Bihar Land Acquisition: राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक क्षेत्र विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण के फैसले से दरभंगा के किसानों में भारी आक्रोश है। हनुमाननगर प्रखंड के सिनुआरा गांव में रविवार को किसान नेता लक्ष्मेश्वर सिंह पप्पू की अध्यक्षता में हुई एक बड़ी बैठक में नौ गांवों के सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर इस फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को मजबूर होंगे।
किसानों का कहना है कि सरकार लगभग 385.48 एकड़ भूमि बिना उनकी सहमति के अधिग्रहित कर रही है। इस योजना की जद में आने से आधे से अधिक किसान भूमिहीन हो जाएंगे, जिससे उनके पास परिवार का भरण-पोषण करने का कोई साधन नहीं बचेगा।






दरभंगा में जमीन अधिग्रहण पर किसानों का फूटा गुस्सा, बोले- ‘भूमिहीन हुए तो परिवार कैसे पालेंगे?’
Darbhanga Land Acquisition: बिहार के दरभंगा जिले में राज्य सरकार के औद्योगिक क्षेत्र विकास की योजना ने किसानों का गुस्सा भड़का दिया है। हनुमाननगर प्रखंड के सिनुआरा गांव में रविवार को कई गांवों के सैकड़ों किसानों ने एकजुट होकर बैठक की। इस दौरान लगभग 385.48 एकड़ भूमि के अधिग्रहण का भारी विरोध करते हुए किसानों ने बड़ा आंदोलन करने का निर्णय लिया है।
किसानों का कहना है कि उनकी सहमति के बिना यह भू-अर्जन किया जा रहा है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। बैठक में सिनुआरा, थलवारा, शोभेपट्टी, हिन्छौल अम्माडीह, तरालाही, अहिला, ओझौल एवं डीहलाही गांवों के किसानों ने भाग लिया और अपनी जमीन इस योजना के लिए नहीं देने की बात एक सुर में कही।
जमीन गई तो रोजगार कैसे मिलेगा? किसानों का बड़ा सवाल
किसानों ने अपनी मुख्य चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भू-अर्जन के दायरे में आने वाले आधे से अधिक किसान भूमिहीन हो जाएंगे। उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं बचेगा। ऐसे में वे अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे, यह एक बड़ा सवाल है। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी रोजी-रोटी छीनकर उन्हें भूमिहीन बनाने पर आमादा है।
किसानों ने एक सुर से अपनी जमीन उक्त योजना में नहीं देने की बात कही। भू-अर्जन की जद में आए आधे से अधिक किसान भूमिहीन हो जाएंगे। उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं बचेगा। ऐसी स्थिति में वे अपने परिवार का भरण- पोषण कैसे करेंगे।
एक्सप्रेस-वे और रेल लाइन के लिए भी गंवाई जमीन
किसानों ने बताया कि सरकार जहां बहादुरपुर एवं हनुमाननगर अंचल की मौजा- तारालाही, मुतनजा, अम्माडीह एवं बिहारी मुकुंद में भू-अर्जन कर रही है, उन्हीं मौजों में आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे के लिए भी केंद्र सरकार ने पहले ही औने-पौने दाम पर मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहित कर ली है। इसके अलावा, कई ग्रिड लाइनें भी उनकी जमीनों से होकर गुजर चुकी हैं। अब दरभंगा-मुजफ्फरपुर प्रस्तावित रेल लाइन के लिए भी इन्हीं किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी।
बंद पड़ी अशोक पेपर मिल का विकल्प क्यों नहीं?
किसानों ने सरकार को एक व्यवहारिक विकल्प भी सुझाया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना स्थल से मात्र दो किलोमीटर दूर, बगल में ही हायाघाट प्रखंड में वर्षों से बंद पड़ी अशोक पेपर मिल का लगभग 400 एकड़ परिसर खाली पड़ा है। किसानों का तर्क है कि यह प्रस्तावित औद्योगिक परिसर वहां बनाया जा सकता है, जिससे राज्य सरकार को एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ेगा और सैकड़ों किसानों को भूमिहीन होने से बचाया जा सकेगा।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी
इस गंभीर मुद्दे को लेकर किसानों ने जिलाधिकारी को एक स्मार-पत्र भी सौंपा है। इसमें किसानों ने साफ तौर पर मांग की है कि उनकी भूमि को भू-अर्जन से मुक्त किया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे लोकतांत्रिक ढंग से विरोध और आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह विरोध प्रदर्शन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
भूमिहीन होने का डर, रोजी-रोटी छिनने का खतरा
किसानों ने एक सुर से अपनी जमीन उक्त योजना में नहीं देने की बात कही। उनका कहना है कि भू-अर्जन की जद में आए आधे से अधिक किसान भूमिहीन हो जाएंगे। उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं बचेगा। ऐसी स्थिति में वे अपने परिवार का भरण-पोषण कैसे करेंगे।
किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि बहादुरपुर एवं हनुमाननगर अंचल की मौजा- तारालाही, मुतनजा, अम्माडीह और बिहारी मुकुंद में पहले ही आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे के लिए केंद्र सरकार ने औने-पौने दाम पर मुआवजा देकर जमीन अधिग्रहित कर ली है। इसके अलावा, कई ग्रिड लाइनें भी उनकी जमीनों से गुजर चुकी हैं। अब दरभंगा-मुजफ्फरपुर प्रस्तावित रेल लाइन के लिए भी इन्हीं किसानों की जमीनें अधिग्रहित की जाएंगी।
बंद पड़ी मिल की जमीन क्यों नहीं?
किसानों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए एक महत्वपूर्ण विकल्प सुझाया है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित औद्योगिक योजना स्थल से मात्र दो किलोमीटर दूर, बगल के हायाघाट प्रखंड में सरकार की लगभग 400 एकड़ में फैली अशोक पेपर मिल वर्षों से बंद पड़ी है। यह परिसर पूरी तरह खाली है, जहां यह प्रस्तावित औद्योगिक परिसर आसानी से बनाया जा सकता है। किसानों का तर्क है कि ऐसा करने से राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण पर एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ेगा, और सैकड़ों किसानों की रोजी-रोटी भी नहीं छिनेगी।
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार सैकड़ों किसानों को भूमिहीन बनाकर उनका रोजगार छीनने पर आमादा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर किसानों ने जिलाधिकारी को एक स्मार-पत्र भी सौंपा है, जिसमें उन्होंने अधिग्रहित की जा रही भूमि को भू-अर्जन से मुक्त करने की मांग की है। यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो यह विरोध प्रदर्शन एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।








