Darbhanga District Council: शनिवार को दरभंगा जिला परिषद में चल रहे लंबे अंदरूनी विवाद ने एक गंभीर मोड़ ले लिया। जिला परिषद के कई निर्वाचित सदस्य अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर जिला परिषद परिसर में एक दिवसीय महाधरना पर बैठ गए। इस प्रदर्शन के दौरान एक सदस्य ने विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आत्मदाह करने की चेतावनी देकर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
दरभंगा में सियासी बवाल! जिला परिषद सदस्य ने दी आत्मदाह की चेतावनी
Bihar Zila Parishad: दरभंगा जिला परिषद में लंबे समय से सुलग रहा अंदरूनी विवाद अब एक बड़े सियासी तूफान में बदल गया है। शनिवार को जिला परिषद के कई सदस्यों ने 10 सूत्री मांगों को लेकर महाधरना दिया, जिसमें एक सदस्य धर्मेंद्र कुमार झा ने तो भ्रष्टाचार और विकास कार्यों में बाधा के विरोध में आत्मदाह तक की चेतावनी दे डाली। इस गंभीर चेतावनी ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि बिहार की राजनीति में भी हड़कंप मचा दिया है।






जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र कुमार झा के नेतृत्व में यह एक दिवसीय महाधरना जिला परिषद परिसर में आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी पर विकास योजनाओं में मनमानी करने, पक्षपात बरतने और जानबूझकर कार्यों को बाधित करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। धरने की पूर्व सूचना प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और उप विकास आयुक्त को भेजी गई थी।
अध्यक्ष रेणु देवी पर लगे गंभीर आरोप: विकास कार्य ठप क्यों?
धर्मेंद्र कुमार झा ने आरोप लगाया कि जिला परिषद की विकास योजनाओं को सोची-समझी रणनीति के तहत रोका जा रहा है, जिससे पूरे जिले में जनहित के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की लगातार अनदेखी की जा रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। उनके अनुसार, अध्यक्ष रेणु देवी के कार्यभार संभालने के बाद से योजनाओं के चयन, स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बढ़ी हैं। कई योजनाओं की स्वीकृति और भुगतान अध्यक्ष के निर्देश पर रोक दिए गए हैं।
करोड़ों की योजनाएं लंबित, मजदूरों का भुगतान अटका
धरनार्थियों ने बताया कि 15वें एवं 16वें वित्त आयोग की अनेक योजनाएं आज भी पोर्टल पर लंबित पड़ी हैं। इन योजनाओं के लिए तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति समय पर नहीं मिल रही है। इसके अलावा, पहले से स्वीकृत 148 योजनाओं का कार्यादेश भी अब तक जारी नहीं किया गया है, जिसके कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। इसका सीधा असर मजदूरों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं पर पड़ रहा है, जिनका लाखों रुपये का भुगतान महीनों से अटका हुआ है। धरनार्थियों ने प्रशासन से इन सभी लंबित योजनाओं का शीघ्र निष्पादन करने, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति तत्काल देने और मजदूरों व आपूर्तिकर्ताओं के बकाया भुगतान का निपटारा करने की मांग की।
“यदि जिला परिषद में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और कथित अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी तथा सभी जिला परिषद सदस्यों की लंबित योजनाओं का भुगतान जल्द नहीं हुआ, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगे।” – धर्मेंद्र कुमार झा, जिला परिषद सदस्य
धरना के दौरान धर्मेंद्र कुमार झा ने भावुक होते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनप्रतिनिधियों की आवाज लगातार दबाई जाती रही और प्रशासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने इस आंदोलन के उग्र होने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों पर डाली।
आत्मदाह की चेतावनी से प्रशासन की बढ़ी चिंता
इस महाधरना में जिला परिषद उपाध्यक्ष अरुणा कुमारी, पूर्व अध्यक्ष सीता देवी के साथ सदस्य लाल कुमार सिंह, मोहम्मद हकीकूल, सुमित्रा देवी और अंजू देवी सहित बड़ी संख्या में अन्य जिला परिषद सदस्य एवं समर्थक भी मौजूद रहे। जिला परिषद परिसर में हुए इस घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रशासन के लिए अब यह एक बड़ी चुनौती बन गई है कि वह कैसे इस गंभीर स्थिति से निपटे और विकास कार्यों को गति दे। सभी की निगाहें अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और धरनार्थियों की मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं, ताकि ऐसे गंभीर कदम उठाने की नौबत न आए।
विकास ठप, लाखों का भुगतान अटका: अध्यक्ष पर मनमानी के आरोप
धरना का नेतृत्व कर रहे जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र कुमार झा ने जिला परिषद अध्यक्ष रेणु देवी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं में मनमानी, पक्षपात और कार्यों को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है, जिससे पूरे जिले में विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। धर्मेंद्र कुमार झा ने दावा किया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के संवैधानिक अधिकारों की लगातार अनदेखी हो रही है और लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 15वें एवं 16वें वित्त आयोग की कई योजनाएं आज भी पोर्टल पर लंबित हैं। तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति समय पर नहीं मिल रही है, जबकि पहले से स्वीकृत 148 योजनाओं का कार्यादेश भी अब तक जारी नहीं किया गया है। इसके चलते विकास कार्य ठप पड़े हैं और मजदूरों के साथ-साथ सामग्री आपूर्तिकर्ताओं का लाखों रुपये का भुगतान महीनों से अटका हुआ है।
भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के खिलाफ आत्मदाह की चेतावनी
धर्मेंद्र कुमार झा ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष रेणु देवी के कार्यभार संभालने के बाद से योजनाओं के चयन, स्वीकृति और भुगतान प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताएं बढ़ी हैं। उनके निर्देश पर कई योजनाओं की स्वीकृति और भुगतान रोक दिए गए, जिससे विकास कार्य पूरी तरह रुक गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिला परिषद की सामान्य बैठकों में बिहार पंचायत राज अधिनियम की भावना के अनुरूप कार्य नहीं हो रहा है और सदस्यों की राय को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
धर्मेंद्र कुमार झा ने भावुक होते हुए कड़ी चेतावनी दी: “यदि जिला परिषद में भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और कथित अनियमितताओं पर रोक नहीं लगी तथा सभी जिला परिषद सदस्यों की लंबित योजनाओं का भुगतान जल्द नहीं हुआ, तो वे आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। जनप्रतिनिधियों की आवाज लगातार दबाई जा रही है और यदि प्रशासन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों की होगी।”
धरनार्थियों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी लंबित योजनाओं का शीघ्र निष्पादन किया जाए, तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति तत्काल दी जाए और मजदूरों व आपूर्तिकर्ताओं के बकाया भुगतान का निपटारा किया जाए। साथ ही, उन्होंने जिला परिषद अध्यक्ष के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
महाधरना में जिला परिषद उपाध्यक्ष अरुणा कुमारी, पूर्व अध्यक्ष सीता देवी और सदस्य लाल कुमार सिंह, मोहम्मद हकीकूल, सुमित्रा देवी, अंजू देवी समेत बड़ी संख्या में अन्य जिला परिषद सदस्य और समर्थक मौजूद रहे। इस घटना के बाद जिले की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई और धरनार्थियों की मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हैं, खासकर आत्मदाह की चेतावनी के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है।








