Bihar Monsoon Session: सोमवार को पटना में बिहार विधानमंडल का पांच दिवसीय मानसून सत्र हंगामेदार माहौल के साथ शुरू हुआ। सत्र के पहले दिन विधानसभा परिसर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का केंद्र बन गया, जहां विपक्षी विधायकों ने नीट परीक्षा में कथित धांधली और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस कारण सदन की कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
बिहार विधानसभा का हंगामाखेज आगाज: 1 लाख करोड़ का बजट और 13 नए बिल, जानें क्या बदलेगा आपके लिए?
Bihar Assembly: सोमवार को बिहार विधानसभा के पांच दिवसीय मॉनसून सत्र का धमाकेदार आगाज हुआ। सत्र के पहले ही दिन एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का अनुपूरक बजट पेश किया गया, जबकि सरकार ने शहरी विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित 13 महत्वपूर्ण विधेयक सदन के पटल पर रखे। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर जमकर हंगामा किया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई।






हंगामेदार शुरुआत और विपक्ष का विरोध
सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य विपक्षी दलों के विधायकों ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे और लगातार नारेबाजी कर रहे थे। विधानसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप कर सदस्यों से शांति बनाए रखने की अपील की, जिसके बाद विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया जा सका।

1 लाख करोड़ से अधिक का अनुपूरक बजट
वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव ने सदन में चालू वित्त वर्ष के लिए 1,02,627 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया। सरकार के अनुसार, इस बजट का उद्देश्य जारी योजनाओं और विभिन्न विभागों के अतिरिक्त खर्चों को पूरा करना है। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लोक कल्याणकारी योजनाओं को इस अनुपूरक बजट से अतिरिक्त धनराशि मिलने की उम्मीद है। विधानसभा में बजट पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
इन 13 विधेयकों पर होगी बहस
बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन सरकार ने कुल 13 विधेयक सदन में पेश किए, जिन पर अब आगे चर्चा होगी। ये विधेयक शहरी शासन, उच्च शिक्षा, कराधान, भूमि प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा और व्यावसायिक विनियमन जैसे अहम क्षेत्रों से संबंधित हैं। पेश किए गए प्रमुख विधेयकों की सूची इस प्रकार है:
- बिहार शहरी विकास विधेयक, 2026
- बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026
- बिहार दुकान एवं प्रतिष्ठान (नियोजन एवं सेवा शर्तों का विनियमन) (निरसन) विधेयक, 2026
- भारतीय स्टाम्प (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026
- पंजीकरण (बिहार संशोधन) विधेयक, 2026
- बिहार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026
- बिहार जुआ (निषेध) विधेयक, 2026
- बिहार माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026
- बिहार कृषि भूमि (गैर-कृषि प्रयोजनों के लिए रूपांतरण) (निरसन) विधेयक, 2026
- बिहार भूमि उत्परिवर्तन (संशोधन) विधेयक, 2026
- बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, 2026
- बिहार नर्स पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
- बिहार चीनी उपक्रम (अधिग्रहण) (संशोधन) विधेयक, 2026
इन विधेयकों पर सदन में गहन विचार-विमर्श और चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
पांच दिवसीय मॉनसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। सरकार इस दौरान महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को पूरा करने का प्रयास करेगी, जबकि विपक्ष बेरोजगारी, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। अनुपूरक बजट और कई विधायी प्रस्तावों के साथ, सत्र के आगामी दिन राज्य के विकास और नीतिगत फैसलों पर महत्वपूर्ण बहसों के गवाह बनेंगे।
छात्रों के भविष्य पर संग्राम: विपक्ष की केंद्र से सीधी भिड़ंत
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक और विधान पार्षद हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विधानसभा परिसर के बाहर जमा हो गए। उन्होंने नीट परीक्षा में कथित पेपर लीक, एनटीए की कार्यप्रणाली और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्षी नेताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।
प्रदर्शन के दौरान ‘छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो’, ‘एनटीए भंग करो’ और ‘पेपर लीक बंद करो’ जैसे नारे लगाए गए।
राजद और वाम दलों के विधायकों ने एनटीए को भंग कर एक नई और अधिक पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई। उनका आरोप था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आ रहे विवादों से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने छात्रों में बढ़ रहे मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाओं पर भी गहरी चिंता व्यक्त की, इसे निष्पक्ष परीक्षा न मिल पाने का परिणाम बताया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति के बावजूद, विपक्ष ने इन मुद्दों को पूरी तैयारी के साथ उठाया।
सरकार की उपलब्धियां बनाम विपक्ष का हंगामा
एक ओर विपक्ष छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेर रहा था, वहीं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत सरकार के सभी प्रमुख मंत्री और सत्तापक्ष के विधायक समय पर विधानसभा पहुंचे थे। सम्राट सरकार के 100 दिन पूरे होने के अवसर पर अपनी उपलब्धियों को सदन के पटल पर रखने की तैयारी थी। सरकार का दावा है कि इस अवधि में विकास, प्रशासनिक सुधार और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। सरकार अनुपूरक बजट और कई महत्वपूर्ण विधेयकों को भी सदन में पेश करने वाली थी।
मानसून सत्र को देखते हुए विधानसभा परिसर और आस-पास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। परिसर के सभी इंट्री प्वाइंट्स पर सघन जांच की व्यवस्था थी, जबकि बड़ी संख्या में पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
सदन की कार्यवाही स्थगित: आगे क्या?
पहले दिन की कार्यवाही पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की बैठक को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। विपक्ष ने साफ संकेत दिए हैं कि नीट, एनटीए और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली जैसे छात्रों से जुड़े मुद्दों को वे सदन के भीतर भी पूरी ताकत से उठाएंगे। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन मुद्दों पर विपक्ष के हमलों का कैसे जवाब देती है और क्या सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाएगी।








