Supaul IDTR: बिहार के सुपौल जिले के विकास और युवाओं के भविष्य के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। बसंतपुर अंचल के वीरपुर मौजा स्थित बनैलीपट्टी में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (IDTR) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। जिला प्रशासन ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 10 एकड़ सरकारी भूमि बिहार सरकार के परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित कर दी है।







जिला पदाधिकारी द्वारा इस संबंध में विधिवत आदेश जारी होने के बाद सुपौल में यह अत्याधुनिक संस्थान स्थापित होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वर्तमान में बिहार में ऐसा केवल एक संस्थान औरंगाबाद में संचालित है, जबकि पटना में दूसरे IDTR की स्थापना पर काम चल रहा है। इस तरह, सुपौल में बनने वाला यह संस्थान बिहार का तीसरा और उत्तर-पूर्वी बिहार का पहला ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र होगा, जो क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
सुपौल में खुलेगा तीसरा IDTR, युवाओं को मिलेगा सीधा फायदा
इस प्रस्तावित संस्थान में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ड्राइविंग प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसमें सड़क सुरक्षा के उन्नत गुर सिखाए जाएंगे, आधुनिक वाहन संचालन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाएगा और हल्के एवं भारी मोटर वाहनों के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे। इसके साथ ही, सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण और गहन अनुसंधान की सुविधाएँ भी विकसित की जाएंगी। इसका सीधा लाभ यह होगा कि प्रशिक्षित और कुशल चालकों की एक नई पीढ़ी तैयार होगी, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर रोजगार के लिए पूरी तरह प्रतिस्पर्धी बन सकेगी।
कोसी-सीमांचल के लिए गेम चेंजर होगा यह संस्थान
परिवहन विभाग के अनुसार, इस नए संस्थान की स्थापना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के ढेरों नए अवसर पैदा होंगे। देश के भीतर और विदेशों में भी प्रशिक्षित चालकों की लगातार मांग बनी हुई है, जिसे यह संस्थान पूरा करने में सहायक होगा। विभाग भविष्य में भारत सरकार के माध्यम से विभिन्न देशों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की भी योजना बना रहा है, ताकि बिहार के प्रशिक्षित युवाओं को वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर आसानी से मिल सकें।
जिला पदाधिकारी ने कहा, ‘राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों और मुख्यमंत्री के कौशल विकास, रोजगार व सुशासन के संकल्प को साकार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संस्थान कोसी और सीमांचल क्षेत्र के हजारों युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगारोन्मुख बनाएगा और क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।’
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुलेंगे रोजगार के दरवाजे
जिला प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना के साकार होने के बाद सुपौल की पहचान केवल एक सीमावर्ती जिले तक सीमित नहीं रहेगी। बल्कि यह कौशल विकास, सड़क सुरक्षा, आधुनिक परिवहन प्रशिक्षण और वैश्विक रोजगार की संभावनाओं के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित होगा। यह पहल बिहार सरकार की दूरदर्शी विकास नीति और जनहितकारी सोच का एक सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करती है, जिससे प्रदेश के युवाओं का भविष्य उज्ज्वल होगा।









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