Bihar Gair Majarua Land: सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को सुरक्षित रखने के लिए बिहार सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में खतियान के आधार पर चिह्नित गैर-मजरूआ जमीन की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी। इस फैसले के बाद, ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर के जरिए अपने आप खारिज हो जाएगी, जिससे अवैध खरीद-फरोख्त पर अंकुश लगेगा।
Bihar Non-Majrua Land: बिहार में अब गैर-मजरूआ जमीन की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है कि खतियान के आधार पर चिह्नित ऐसी जमीनों का अवैध लेनदेन न हो सके। अब सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री को तत्काल प्रभाव से रोका जाएगा।





राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग को पत्र लिखकर सूचित किया है। विशेष सचिव नवाजिश अख्तर ने गुरुवार को यह जानकारी साझा की, जिसमें बताया गया कि सरकार को गैर-मजरूआ जमीनों की खरीद-बिक्री की सूचनाएं मिल रही थीं, जिसके बाद यह कठोर फैसला लिया गया है। इस पहल से सार्वजनिक उपयोग की जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
जमीन की अवैध खरीद-बिक्री पर शिकंजा
बिहार सरकार ने सार्वजनिक संपत्ति को बचाने और अवैध भूमि सौदों पर लगाम कसने के लिए यह निर्णायक कदम उठाया है। राजस्व विभाग खतियान में दर्ज सभी गैर-मजरूआ जमीनों की विस्तृत सूची निबंधन विभाग को सौंपेगा। इस सूची के आधार पर निबंधन विभाग अपने सॉफ्टवेयर में आवश्यक बदलाव करेगा, ताकि जब भी कोई ऐसी जमीन की रजिस्ट्री का प्रयास करे, तो सॉफ्टवेयर उसे स्वतः ही अस्वीकृत कर दे। इससे भूमि माफिया पर सीधा शिकंजा कसा जा सकेगा और जनता की संपत्ति सुरक्षित रहेगी।
सार्वजनिक जमीनों की सुरक्षा को प्राथमिकता
गैर-मजरूआ जमीनें वे होती हैं जो किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर नहीं होतीं, बल्कि सार्वजनिक उपयोग या सरकार के अधीन होती हैं। इनमें चारागाह, रास्ते, तालाब, सरकारी भवन के लिए आरक्षित भूमि जैसी संपत्तियां शामिल होती हैं। इनकी अवैध खरीद-बिक्री से न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान होता है, बल्कि आम जनता को भी उनके अधिकारों से वंचित होना पड़ता है। विशेष सचिव नवाजिश अख्तर ने बताया कि इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य इन महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों को हर हाल में सुरक्षित रखना है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव नवाजिश अख्तर ने कहा, ‘खतियान के आधार पर चिह्नित गैर-मजरूआ जमीन की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाएगी। हमने मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग को इसकी जानकारी दे दी है, ताकि सॉफ्टवेयर के माध्यम से ऐसी जमीनों की रजिस्ट्री रोकी जा सके।’
यह कदम बिहार में भूमि सुधार और पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में भूमि संबंधी विवाद कम हों और हर नागरिक की संपत्ति सुरक्षित रहे, विशेषकर वे जमीनें जो सामूहिक उपयोग के लिए हैं।
गैर-मजरूआ जमीन की बिक्री पर क्यों लगी रोक?
सरकार को लगातार ऐसी गैर-मजरूआ जमीनों की खरीद-बिक्री की सूचनाएं मिल रही थीं, जो मूल रूप से सार्वजनिक उपयोग के लिए होती हैं। इन जमीनों के अवैध हस्तांतरण को रोकने और जनता के हित को साधने के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इस संबंध में मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग को जानकारी दी है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के विशेष सचिव नवाजिश अख्तर ने गुरुवार को पत्र के माध्यम से इसकी जानकारी मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग को दी है। राजस्व विभाग निबंधन विभाग को ऐसी जमीनों की सूची उपलब्ध कराएगा, ताकि सॉफ्टवेयर के माध्यम से इनकी रजिस्ट्री रोकी जा सके।
सॉफ्टवेयर ऐसे रोकेगा अवैध रजिस्ट्री
इस नई व्यवस्था के तहत, राजस्व विभाग उन सभी गैर-मजरूआ जमीनों की विस्तृत सूची तैयार कर निबंधन विभाग को सौंपेगा, जिनकी बिक्री पर रोक लगनी है। निबंधन विभाग इस सूची को अपने रजिस्ट्री सॉफ्टवेयर में अपडेट करेगा। जैसे ही कोई व्यक्ति ऐसी गैर-मजरूआ जमीन रजिस्ट्री कराने की कोशिश करेगा, सॉफ्टवेयर उसे तुरंत अस्वीकार कर देगा। यह कदम सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूमि संबंधी धोखाधड़ी को रोकने में सहायक सिद्ध होगा।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
बिहार सरकार का यह फैसला आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा। इससे सार्वजनिक उपयोग की भूमि, जैसे कि चरागाह, तालाब, श्मशान घाट, और सड़कों के किनारे की जमीनें सुरक्षित रहेंगी। इन जमीनों पर अतिक्रमण या अवैध कब्जे की संभावना कम होगी, जिससे विकास कार्यों और सामुदायिक सुविधाओं के लिए भूमि की उपलब्धता बनी रहेगी। इस पहल से भूमि विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।






