Sawan Somwar: सावन माह का पहला सोमवार भगवान शिव को समर्पित अत्यंत पवित्र दिनों में से एक है। इस दिन भोलेनाथ की सच्ची श्रद्धा से आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात॥
बेलपत्र, भांग-धतूरा और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से अधूरे कार्य भी पूरे होते हैं। आइए जानते हैं बिहार समेत पूरे देश में मनाए जा रहे सावन के पहले सोमवार की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि, ताकि आप भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त कर सकें।






सावन का पहला सोमवार: 3 अगस्त को करें ये 4 काम, चमक जाएगी किस्मत, भोलेनाथ देंगे मनचाहा वरदान!
Sawan Somwar: सावन माह का पहला सोमवार 3 अगस्त को मनाया जाएगा। भगवान शिव को समर्पित यह दिन भक्तों के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस पवित्र अवसर पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने, बेलपत्र, भांग और धतूरा जैसी पूजन सामग्री अर्पित करने से सभी अधूरे कार्य पूरे होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वैवाहिक जीवन सहित प्रेम संबंधों में भी सुख-समृद्धि आती है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है, जिससे श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत एवं पूजा करने पर भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
सावन के पहले सोमवार का अद्भुत संयोग और महत्व
श्रावण के पहले सोमवार यानी 3 अगस्त को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। सुकर्मा योग को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ऐसे में इस योग में भगवान शिव की स्तुति करना बेहद पुण्यकारी होता है। यह संयोग भक्तों को विशेष फल प्रदान करेगा और उनकी प्रार्थनाएं शीघ्र स्वीकार होंगी।
भोलेनाथ की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
सावन के पहले सोमवार पर भगवान शिव की पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं, जिनमें विशेष आराधना करने से अधिकतम लाभ प्राप्त होता है। इन निर्धारित समयों पर पूजा करने से भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक। इस समय भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक। शिव आराधना और अभिषेक के लिए यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होता है।
- प्रदोष काल: शाम 06:26 बजे से 07:56 बजे तक। भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए प्रदोष काल अत्यंत शुभ माना जाता है।
- निशिता काल: रात्रि 11:33 बजे से 12:21 बजे तक। महाकाल की कृपा प्राप्त करने और मनोकामनाएं पूरी करने के लिए यह समय विशेष फलदायी है।
ऐसे करें सावन के पहले सोमवार की पूजा, पूरी होगी हर मनोकामना
सावन के पहले Sawan Somwar पर भगवान शिव की पूजा के लिए कुछ विशेष नियम और सामग्री आवश्यक है। पंडित भरत राम रतूड़ी बताते हैं कि रविवार की रात सोने से पहले घर को, खासकर पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें। सुबह की पूजा के लिए फूल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, फल, अगरबत्ती, दीपक, कपूर और भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग जैसे आवश्यक सामान पहले से तैयार रखें।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करना चाहिए। अभिषेक के बाद पुनः स्वच्छ जल अर्पित करके शिवलिंग पर बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं। बेलपत्र तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा होना चाहिए। इसके अलावा धतूरा, आक का फूल, भांग, सफेद चंदन, सफेद पुष्प, अक्षत, जनेऊ, मौसमी फल और मिष्ठान भी अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के दौरान ‘ऊं नमः शिवाय’ का जाप करते रहें। शिव चालीसा अथवा रुद्राष्टक का पाठ विशेष फलदायी होता है।
शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें
पूजा शुरू करने से पहले भगवान शिव के शिवलिंग या प्रतिमा के सामने शांत मन से बैठकर संकल्प लेना चाहिए। संकल्प का अर्थ है पूरी भक्ति और श्रद्धा से व्रत निभाने का पवित्र वचन देना, जिसमें मन से अपनी इच्छाएं और प्रार्थनाएं भगवान शिव के चरणों में अर्पित की जाती हैं।
पंडित सदानंद झा ने बताया, ‘शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, केतकी का फूल, तुलसी दल और नारियल का पानी अर्पित नहीं करना चाहिए। भोलेबाबा को दूध-जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा अर्पित करके मनोकामना पूर्ति की याचना करनी चाहिए। शिव पूजा में इन वर्जित चीजों का उपयोग नहीं किया जाता।’
श्रावण के सोमवार पर शिव पूजा से ग्रह दोषों की शांति होती है, मानसिक तनाव में कमी आती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है। इन नियमों का पालन कर भक्त भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
शुभ योग में सावन के पहले सोमवार की पूजा
पंडित सदानंद झा के अनुसार, श्रावण के पहले सोमवार यानी 03 अगस्त को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। सुकर्मा योग को अत्यंत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। इस योग में भगवान शिव की स्तुति करना विशेष पुण्यकारी फल देता है। यह वैवाहिक और प्रेम जीवन में भी सुख-समृद्धि लाता है।
सावन के पहले सोमवार के शुभ मुहूर्त फिर से नोट करें
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक। इस दौरान भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक। शिव आराधना और अभिषेक के लिए यह सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त होता है।
- प्रदोष काल: शाम 06:26 बजे से 07:56 बजे तक। भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए प्रदोष काल अत्यंत शुभ होता है।
- निशिता काल: रात्रि 11:33 बजे से 12:21 बजे तक। महाकाल की कृपा और मनोकामनाएं पूरी करने के लिए यह समय विशेष फलदायी है।
सही पूजा विधि से पाएं भगवान शिव की कृपा
पंडित सदानंद झा बताते हैं कि सावन के सोमवार पर व्रत रखने वाले श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। पंचामृत (कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर) से अभिषेक करना विशेष लाभकारी होता है। अभिषेक के बाद पुनः स्वच्छ जल अर्पित करें।
पंडित सदानंद झा के अनुसार, ‘शिवलिंग पर बेलपत्र अवश्य चढ़ाएं। बेलपत्र तीन पत्तियों वाला, साफ और बिना टूटा होना चाहिए। इसके अलावा धतूरा, आक का फूल, भांग, सफेद चंदन, सफेद पुष्प, अक्षत, जनेऊ, मौसमी फल और मिष्ठान भी अर्पित कर सकते हैं। पूजा के दौरान ‘ऊं नमः शिवाय’ का जाप करते रहें। शिव चालीसा अथवा रुद्राष्टक का पाठ विशेष फलदायी होता है।’
फलाफल के अनुसार, रविवार की रात सोने से पहले घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ कर लें। सुबह की पूजा के लिए सभी आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखें। इसमें फूल, बेलपत्र, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, फल, अगरबत्ती, दीपक, कपूर और भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग शामिल हैं।
शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं?
पंडित सदानंद झा बताते हैं कि पूजा शुरू करने से पहले शांत मन से भगवान शिव के शिवलिंग या प्रतिमा के सामने बैठकर संकल्प लें। संकल्प का अर्थ है पूरी भक्ति और श्रद्धा से व्रत निभाने का पवित्र वचन देना। मन से अपनी इच्छाएं और प्रार्थनाएं भगवान शिव के चरणों में अर्पित करें।
शिवलिंग पर कुछ विशेष चीजें नहीं चढ़ाई जाती हैं। इनमें हल्दी, सिंदूर, केतकी का फूल, तुलसी दल और नारियल का पानी शामिल हैं। भोलेबाबा के शिवलिंग पर दूध-जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा अर्पित करके मनोकामना पूर्ति की याचना करनी चाहिए। सावन के सोमवार पर सही विधि से की गई शिव पूजा से ग्रह दोषों की शांति होती है, मानसिक तनाव में कमी आती है और परिवार में सुख-शांति का वास होता है।








