Jharkhand Police Encounter: झारखंड में व्यापारियों के लिए आतंक का पर्याय बन चुके कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को झारखंड पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया है। रविवार रात जामताड़ा में हुई इस कार्रवाई से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है, वहीं धनबाद के कारोबारी वर्ग ने राहत की सांस ली है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा का नाम यूपी के गैंगस्टर अमन सिंह से लेकर पाकिस्तान में छिपे प्रिंस खान तक के नेटवर्क से जुड़ा था, जिसने पूरे राज्य में रंगदारी का जाल बिछा रखा था।
खूंखार गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का एनकाउंटर! झारखंड पुलिस ने ऐसे किया आतंक का अंत, कारोबारियों को मिली राहत
Jharkhand Gangster: झारखंड में रंगदारी और आतंक का पर्याय बन चुके कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया है। जामताड़ा के सुपायडीह बाइपास के पास रविवार रात हुई इस मुठभेड़ में झारखंड गैंगस्टर सुजीत सिन्हा मारा गया, जिससे कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय से पुलिस की नजर में रहा यह अपराधी कई बड़े गैंगस्टरों से जुड़ा था और पूरे राज्य में अपना आपराधिक नेटवर्क फैला रहा था।






कारोबारियों का काल था सुजीत सिन्हा, ऐसे फैलाया था आतंक
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा ने व्यापारियों के बीच भारी दहशत फैला रखी थी। उसके खिलाफ धनबाद के बैंक मोड़ और सरायढेला थाना में रंगदारी और धमकी से जुड़े कई मामले दर्ज थे। साल 2020-21 के दौरान उसने अपने सहयोगी मयंक सिंह के जरिए धनबाद के अनेक कारोबारियों को धमकी दी थी। बैंक मोड़ स्थित उर्मिला टावर के कंप्यूटर कारोबारियों के अलावा सरायढेला के कुसुम विहार में एक आउटसोर्सिंग कंपनी के महाप्रबंधक (जीएम) से भी 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी, जिससे इलाके में भय का माहौल था।
प्रिंस खान और अमन सिंह से भी थे गहरे संबंध, ऐसे चलाता था नेटवर्क
जांच एजेंसियों ने बताया कि वर्ष 2025 में प्रिंस खान ने रंगदारी वसूली के लिए सुजीत सिन्हा गिरोह के साथ हाथ मिलाया था। चाईबासा, जमशेदपुर और चक्रधरपुर के लगभग एक दर्जन युवक, जो पहले सुजीत सिन्हा गिरोह से जुड़े थे, बाद में प्रिंस खान के लिए काम करने लगे। पुलिस का मानना है कि कारोबारियों की जानकारी जुटाने और स्थानीय नेटवर्क खड़ा करने में सुजीत की अहम भूमिका थी। सुजीत सिन्हा का नाम यूपी के गैंगस्टर अमन सिंह के साथ भी जुड़ा था। धनबाद का कुख्यात रंगदार सूरज सिंह भी शुरुआती दौर में सुजीत सिन्हा के गिरोह का हिस्सा था। बाद में उसने अपना अलग रंगदारी नेटवर्क खड़ा कर लिया। धनबाद का राजेश वधावन भी पहले सुजीत गिरोह और बाद में अमन सिंह तथा प्रिंस खान के नेटवर्क से जुड़ गया था।
ऐसे हुआ खूंखार गैंगस्टर का खात्मा, पुलिस ने दी जानकारी
सुजीत सिन्हा को 2 जून 2021 को जमशेदपुर की घाघीडीह जेल से धनबाद जेल लाया गया था। इसके कुछ महीनों बाद उसे गुमला जेल और फिर मेदिनीनगर सेंट्रल जेल से साहिबगंज मंडल कारा स्थानांतरित किया गया। रविवार को उसे साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल ले जाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, रविवार रात जामताड़ा के सुपायडीह बाइपास के पास एस्कॉर्ट वाहन का टायर पंचर हो गया। जब पुलिस उसे दूसरी गाड़ी में बैठा रही थी, तभी उसने कथित तौर पर एक जवान का हथियार छीन लिया और फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे वहीं ढेर कर दिया।
जामताड़ा के एसपी शंभु कुमार सिंह ने इस मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए कहा, ‘मामले की जांच की जा रही है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।’
इस एनकाउंटर से झारखंड के आपराधिक इतिहास में एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगने और व्यापारियों के बीच सुरक्षा की भावना बढ़ने की उम्मीद है।
रंगदारी से कांपते थे धनबाद के कारोबारी
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के खिलाफ धनबाद के बैंक मोड़ और सरायढेला थाना में रंगदारी और धमकी के कई मामले दर्ज थे। वर्ष 2020-21 के दौरान, उसने अपने सहयोगी मयंक सिंह के माध्यम से धनबाद के कई व्यापारियों को धमकी दी थी। बैंक मोड़ स्थित उर्मिला टावर के कंप्यूटर कारोबारियों से लेकर सरायढेला के कुसुम विहार में एक आउटसोर्सिंग कंपनी के महाप्रबंधक (जीएम) तक से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई थी, जिससे इलाके में दहशत का माहौल था।
पाकिस्तान में छिपे प्रिंस खान से जुड़ा था नेटवर्क
जांच एजेंसियों के मुताबिक, वर्ष 2025 में प्रिंस खान ने रंगदारी वसूली के लिए सुजीत सिन्हा गिरोह के साथ हाथ मिला लिया था। चाईबासा, जमशेदपुर और चक्रधरपुर के करीब एक दर्जन युवा, जो पहले सुजीत सिन्हा के गिरोह से जुड़े थे, बाद में प्रिंस खान के लिए काम करने लगे। पुलिस मानती है कि व्यापारियों की जानकारी जुटाने और स्थानीय स्तर पर अपना नेटवर्क खड़ा करने में सुजीत की अहम भूमिका थी। सुजीत सिन्हा का नाम पहले यूपी के गैंगस्टर अमन सिंह से भी जुड़ा था। धनबाद का कुख्यात रंगदार सूरज सिंह भी शुरुआती दौर में इसी गिरोह का हिस्सा था। राजेश वधावन भी पहले सुजीत गिरोह और बाद में अमन सिंह और प्रिंस खान के नेटवर्क से जुड़ा।
ऐसे हुआ गैंगस्टर सुजीत का एनकाउंटर
पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा को 2 जून 2021 को जमशेदपुर की घाघीडीह जेल से धनबाद जेल लाया गया था। बाद में उसे गुमला जेल और फिर मेदिनीनगर सेंट्रल जेल से साहिबगंज मंडल कारा स्थानांतरित किया गया। रविवार को उसे साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था। इसी दौरान, जामताड़ा के सुपायडीह बाइपास के पास पुलिस एस्कॉर्ट वाहन पंचर हो गया। जब पुलिस उसे दूसरी गाड़ी में बैठा रही थी, तभी उसने कथित तौर पर एक जवान का हथियार छीन लिया और गोलीबारी करते हुए भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया।
जामताड़ा के एसपी शंभु कुमार सिंह ने इस मुठभेड़ की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
इस एनकाउंटर से यह संदेश गया है कि झारखंड में आपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी, जिससे राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी और आम लोगों को राहत मिलेगी।








