Bihar Agriculture News: बिहार में किसानों को खाद की कालाबाजारी और तय दाम से अधिक पर बिक्री से राहत देने के लिए कृषि विभाग ने बड़ा अभियान छेड़ा है। इसी कड़ी में पूर्वी चंपारण के मोतिहारी जिले में ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद छह उर्वरक और एक बीज प्रतिष्ठान का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के सख्त निर्देश पर जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) को तत्काल प्रभाव से मुख्यालय पटना बुला लिया गया है।
खाद माफियाओं पर मंत्री का सीधा वार
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उर्वरक की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने का स्पष्ट आदेश दिया है। उनके निर्देश के बाद 04 अगस्त, 2026 को कृषि निदेशक, बिहार, श्री मुकेश कुमार लाल ने मोतिहारी में उर्वरक एवं बीज प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। संयुक्त कृषि भवन मोतिहारी में एक समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई, जिसके बाद अधिकारियों की संयुक्त टीम और उड़दस्ता दल ने जिले के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी की।






डीएओ मोतिहारी हटाए गए, सहायक निदेशक को अतिरिक्त प्रभार
इस कार्रवाई के दौरान छह उर्वरक प्रतिष्ठानों और एक बीज विक्रेता एवं कीटनाशी प्रतिष्ठान के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए। कई अन्य दुकानों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। अनियमितताओं पर सख्ती दिखाते हुए मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जिला कृषि पदाधिकारी, मोतिहारी को तत्काल मुख्यालय, पटना में योगदान देने का निर्देश दिया। उनकी जगह सहायक निदेशक (शस्य) श्री मृणाल शास्त्री को मोतिहारी के जिला कृषि पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
किसानों के हित से कोई समझौता नहीं: मंत्री
मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले में नियमित और सघन छापेमारी अभियान लगातार जारी रखा जाए। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को निर्धारित मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हो सके और किसी भी तरह की कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
“किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा तथा उर्वरक वितरण में अनियमितता करने वाले व्यक्तियों एवं प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।”
कृषि विभाग की यह कार्रवाई प्रदेश भर के किसानों के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है। मंत्री के इस कदम से उर्वरक माफियाओं में हड़कंप मच गया है और आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई की उम्मीद है, ताकि कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता और किसानों का विश्वास कायम रहे।








