Bihar Police: बिहार के भोजपुर जिले में स्थित शाहपुर के बिलौटी गांव में हुए बहुचर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने पुलिस के अधिकारों और गोलीबारी के संबंध में एक बड़ा बयान दिया है। डीजीपी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पुलिस को कानून के दायरे में रहकर काम करना है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें गोली चलाने का अधिकार भी है। इसी बीच, राज्य सरकार ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत देते हुए सरकारी नौकरी और मुआवजे की घोषणा की है।
पुलिस को गोली चलाने का अधिकार: डीजीपी विनय कुमार
डीजीपी विनय कुमार ने पुलिस द्वारा फायरिंग के मुद्दे पर जोर देते हुए कहा, ‘अगर पुलिस परिस्थिति के अनुसार गोली नहीं चलाएगी, तो वह अपना काम कैसे करेगी?’ उन्होंने साफ किया कि पुलिस अधिकारियों को नियमों के तहत बल प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि अपनी सीमा लांघने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। इस बयान से बिहार पुलिस के कामकाज और अधिकारों को लेकर चल रही बहस को नई दिशा मिली है।
अगर पुलिस परिस्थिति के अनुसार गोली नहीं चलाएगी, तो वह अपना काम कैसे करेगी। पुलिस अधिकारियों को नियम के तहत बल प्रयोग का अधिकार है। – विनय कुमार, डीजीपी बिहार
मुख्यमंत्री की घोषणा: परिवार को नौकरी और मुआवजा
यह घटना 17 जून 2026 को आरा के शाहपुर थाना क्षेत्र में हुई थी। पुलिस ने इसे मुठभेड़ बताया था, जिसमें कुल पांच राउंड फायरिंग की गई थी। पुलिस के मुताबिक, एसटीएफ जवान अक्षय कुमार ने चार और तत्कालीन थानाध्यक्ष ने एक गोली चलाई थी। हालांकि, भरत तिवारी के परिजनों का आरोप है कि आत्मसमर्पण करने के बावजूद उनकी हत्या की गई और यह एक फर्जी एनकाउंटर था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भरत तिवारी के शरीर में पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद यह मामला और गरमा गया।
बढ़ते विवाद के बीच, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से पीड़ित परिवार के लिए राहत की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि न्यायिक जांच आयोग की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर बिहार सरकार परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इसके साथ ही, परिवार के किसी एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी। कुछ दिन पहले ही भरत तिवारी के परिजनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई थी।
एके-47 के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई
डीजीपी विनय कुमार ने छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा एके-47 के इस्तेमाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पुलिस को यह हथियार चलाने का अधिकार नहीं है। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जिस किसी ने भी एके-47 का इस्तेमाल किया था, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए गए हैं। यह दर्शाता है कि भोजपुर में पुलिस अपने बल प्रयोग के नियमों को लेकर गंभीर है और किसी भी उल्लंघन पर कार्रवाई करने को प्रतिबद्ध है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सरकार और पुलिस दोनों की तरफ से उठाए गए ये कदम महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर पीड़ित परिवार को राहत दी गई है, वहीं दूसरी ओर पुलिस के अधिकारों और जवाबदेही पर भी स्पष्टता लाने का प्रयास किया गया है। आने वाले समय में न्यायिक जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट और उस पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।







