Bihar Cybercrime: बिहार में बढ़ते साइबर अपराधों पर अब पुलिस ने कड़ा रुख अपना लिया है। राज्य के डीजीपी विनय कुमार ने इस संबंध में सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि एक आईडी पर नौ से अधिक सिम कार्ड रखने वाले व्यक्तियों पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले सौ से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है, और ऐसे लोगों को भी बख्शा नहीं जाएगा।
राजधानी पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डीजीपी विनय कुमार ने एक चौंकाने वाली कहानी साझा की। उन्होंने सुपौल जिले के गौसपुर गांव के 21 वर्षीय हर्षित कुमार मिश्रा के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया। हर्षित ने महज दो सालों में सिम बॉक्स के जरिए करोड़ों की संपत्ति बना ली थी। डीजीपी ने सवाल उठाया कि कैसे उसका परिवार और गांव के लोग उसकी करतूतों को जानते हुए भी चुप रहे और पुलिस को सूचना देना उचित नहीं समझा।
DGP की चेतावनी: 9 से ज्यादा सिम और फर्जी आधार पर होगी कार्रवाई
डीजीपी विनय कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि साइबर क्राइम पूरे राष्ट्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। बिहार में अब तक 7000 से अधिक साइबर अपराध से जुड़े मामले दर्ज किए जा चुके हैं। उन्होंने एक गंभीर समस्या की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें एयरटेल जैसी कंपनियों ने एक ही आईडी पर 50 से 100 सिम कार्ड जारी कर दिए हैं, जबकि नियमों के अनुसार एक आईडी पर नौ से ज्यादा सिम नहीं दिए जा सकते।
डीजीपी विनय कुमार ने कहा, ‘एक आईडी पर 9 से अधिक सिम लेने वाले व्यक्ति पर अब कार्रवाई होगी। फर्जी आधार कार्ड बनाने वालों को भी नहीं बख्शा जाएगा।’
उन्होंने बताया कि नौ से ज्यादा सिम कार्ड लेने वालों की पहचान की जा रही है और ऐसे सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, फर्जी आधार बनाने वाले 100 लोगों के खिलाफ पहले ही प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है।
सुपौल का ‘करोड़पति’ साइबर ठग हर्षित मिश्रा और उसका सिंडिकेट
डीजीपी विनय कुमार ने पिछले साल जुलाई में बिहार पुलिस द्वारा उजागर किए गए सिम बॉक्स रैकेट की कहानी सुनाई, जिसका मुख्य आरोपी सुपौल के गौसपुर गांव का हर्षित कुमार मिश्रा था। इस इंटर पास लड़के ने अपने तीन मंजिला मकान से चीन और नेपाल के सहयोग से सिम बॉक्स उपकरण स्थापित किए थे। वह थाईलैंड और वियतनाम से उपकरण लाकर प्रतिदिन 25,000 से अधिक कॉल देश-विदेश में कर रहा था।
पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने हर्षित को साल भर पहले गिरफ्तार किया था। उसने महज तीन साल के भीतर 21 करोड़ रुपये से अधिक की अकूत संपत्ति और एक शानदार जीवनशैली बना ली थी। वह इंस्टाग्राम और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए चीनी साइबर अपराधियों और हैकर्स के संपर्क में आया था। ठगी के पैसों से उसने दुबई और मलेशिया में 10 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके अलावा, मोतिहारी में 12-14 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और 3 करोड़ रुपये से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी का भी पता चला था। वह खुद को शेयर बाजार और रियल एस्टेट का व्यापारी बताता था और युवा जदयू का प्रदेश सचिव बनकर अपने काले धंधे को छुपा रहा था।
छापेमारी और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों की संलिप्तता
पिछले साल 21 जुलाई को बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई ने दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर सुपौल में हर्षित के ठिकाने पर 19 घंटे तक मैराथन छापेमारी की थी। इस दौरान उसके घर से 8 सिम बॉक्स डिवाइस, 1,300 से अधिक अवैध सिम कार्ड, बायोमेट्रिक मशीनें और पैसे गिनने की मशीन बरामद की गई थी। मामले की गंभीरता और इसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी एजेंसियां भी जांच में शामिल हुई थीं। डीजीपी ने समाज से आह्वान किया है कि ऐसे अपराधों की जानकारी पुलिस को तुरंत दें ताकि इस चुनौती से निपटा जा सके। पढ़ें विस्तार से
बिहार में साइबर क्राइम पर DGP का बड़ा एक्शन: 9 से ज्यादा सिम हैं तो हो जाएं सावधान!
Bihar Cyber Crime: बिहार में साइबर अपराध के तेजी से बढ़ते मामलों ने पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। इसी कड़ी में, राज्य के डीजीपी विनय कुमार ने साइबर अपराधियों के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि एक आईडी पर 9 से अधिक सिम कार्ड रखने वाले व्यक्तियों पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले लोगों को भी बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा।
डीजीपी विनय कुमार ने पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान साइबर अपराध की नई चुनौतियों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि अब तक 7000 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और यह समस्या पूरे देश को परेशान कर रही है। उन्होंने एक हैरान कर देने वाला खुलासा किया कि एयरटेल जैसी कंपनी ने एक-एक आईडी पर 50 से 100 सिम तक जारी किए हैं, जबकि नियम यह है कि एक आईडी पर 9 से ज्यादा सिम नहीं दिए जा सकते। डीजीपी ने साफ किया कि 9 से ज्यादा सिम कार्ड लेने वालों को चिह्नित किया जा रहा है और ऐसे सभी लोगों पर कार्रवाई तय है। वहीं, फर्जी आधार बनाने वाले 100 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
करोड़पति साइबर अपराधी हर्षित मिश्रा का चौंकाने वाला मामला
डीजीपी विनय कुमार ने साइबर अपराध की गंभीरता को समझाने के लिए सुपौल जिले के गौसपुर गांव निवासी 21 वर्षीय हर्षित कुमार मिश्रा के एक मामले का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे हर्षित ने महज दो साल में सिम बॉक्स के माध्यम से एक अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट चलाकर करोड़ों रुपये कमाए। डीजीपी ने पिछले साल जुलाई में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा किए गए इस ‘सिम बॉक्स’ उद्भेदन की पूरी कहानी मीडियाकर्मियों को सुनाई।
‘एक लड़का सुपौल के गांव में बैठकर विश्वभर में 25000 कॉल कर रहा था। देश से लेकर विदेशों में कॉल कर रहा था। इंटर पास लड़का थाईलैंड और वियतनाम गया और वहां से इक्विपमेंट लाया। चाइनीज और नेपाल के सहयोग से इंस्टॉल करके अपने तीन मंजिला मकान में काम कर रहा था। दो साल में 11 करोड़ रुपया कमाया। क्या इसकी जानकारी उसके घरवालों को नहीं थी? गांव वालों को पता नहीं था? यह डिजिटल क्राइम है, समाज के लिए चुनौती है। इससे पुलिस ही नहीं पूरा समाज प्रभावित हो रहा है।’ — डीजीपी विनय कुमार
डीजीपी ने सवाल उठाया कि जब पूरे गांव को पता था कि यह लड़का बहुत कम समय में करोड़पति बन गया है, तो यह बात पुलिस को क्यों नहीं बताई गई।
कैसे हर्षित मिश्रा ने खड़ा किया 21 करोड़ का साम्राज्य?
पिछले साल, आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने हर्षित कुमार मिश्रा को सिम बॉक्स के जरिए अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हर्षित ने महज तीन साल के भीतर 21 करोड़ रुपये से अधिक की अकूत संपत्ति और बेहद लग्जरी लाइफस्टाइल बना ली थी। वह रोज 25,000 से अधिक फर्जी कॉल और मैसेज करवाता था। उसने चीन और वियतनाम से अवैध ‘सिम बॉक्स’ उपकरण मंगवाकर अपने घर में एक पूरा सेटअप तैयार किया था। इंस्टाग्राम और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए वह चीनी साइबर अपराधियों और हैकर्स के संपर्क में आया था।
ठगी के पैसों से हर्षित ने दुबई और मलेशिया में 10 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसके अलावा, मोतिहारी में 12-14 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और 3 करोड़ रुपये से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी का भी पता चला था। वह खुद को शेयर बाजार और रियल एस्टेट का व्यापारी बताता था, और युवा जदयू के प्रदेश सचिव जैसे राजनीतिक रसूख की आड़ में इस काले धंधे को छुपाए हुए था। पिछले साल 21 जुलाई को हर्षित के ठिकाने पर 19 घंटे तक मैराथन छापेमारी की गई थी। इस दौरान उसके घर से 8 सिम बॉक्स डिवाइस, 1300 से अधिक अवैध सिम कार्ड, बायोमेट्रिक मशीनें और पैसे गिनने की मशीन बरामद हुई थी। मामले की गंभीरता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी एजेंसियां भी इस जांच में शामिल हुई थीं।
Bihar में साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस की तैयारी
डीजीपी विनय कुमार के इस बयान से साफ है कि बिहार पुलिस साइबर अपराध के खिलाफ अपनी मुहिम को और तेज करने जा रही है। एक ओर जहां वह ऐसे बड़े सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को भी नियमों के प्रति जागरूक कर रही है। एक आईडी पर अधिक सिम रखने या फर्जी आधार का इस्तेमाल करने वालों पर होने वाली कार्रवाई यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में हर्षित मिश्रा जैसे मामलों को रोका जा सके और डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके।







