Patna News: प्रशांत किशोर, जो हाल ही में बांकीपुर से विधायक चुने गए हैं, 17 अगस्त, 2026 को बिहार विधानसभा में पद और गोपनीयता की शपथ लेंगे। यह उनकी पहली चुनावी जीत के बाद विधायी कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत होगी। शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को सुबह 10:30 बजे विधानसभा में निर्धारित है। इस महत्वपूर्ण घटना की खबर प्रशांत किशोर के कार्यालय ने सोशल मीडिया पर साझा की, इसे बांकीपुर में बदलाव के एक नए युग की शुरुआत बताया।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 2026 के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत हासिल की है। उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को हराकर पटना की इस सीट पर पार्टी के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को समाप्त कर दिया है। यह जीत प्रशांत किशोर के राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है। यह Patna News में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम है।

बांकीपुर उपचुनाव: जीत का मार्जिन और प्रमुख उम्मीदवार
उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को हुआ था और परिणाम 3 अगस्त को घोषित किए गए। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत किशोर को 64,151 वोट मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 वोट प्राप्त हुए। राजद उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,273 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। यह परिणाम उनकी पहली चुनावी जीत थी और इसने उस निर्वाचन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उलटफेर को चिह्नित किया, जिसे लगभग तीन दशकों से भाजपा का गढ़ माना जाता था।
प्रशांत किशोर की जीत ने बांकीपुर सीट पर भाजपा के दशकों पुराने वर्चस्व को खत्म कर दिया है, जो बिहार की राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव है।
कैसे खाली हुई थी बांकीपुर सीट?
बांकीपुर सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद खाली हुई थी, जिसके कारण उपचुनाव कराना पड़ा। पटना की यह शहरी सीट लंबे समय से भाजपा से जुड़ी रही थी, लेकिन 2026 के चुनाव में पार्टी को निर्णायक हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस उपचुनाव में मतदाता turnout पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में कम रहा। 2025 के विधानसभा चुनाव में बांकीपुर में 41.39% मतदान हुआ था, जबकि 2026 के उपचुनाव में यह 34.3% रहा।
प्रशांत किशोर का 17 अगस्त को शपथ ग्रहण समारोह बिहार विधानसभा में बांकीपुर के प्रतिनिधि के रूप में उनके कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक होगा। उनकी इस जीत को बिहार की राजनीतिक गलियारों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है।







