Darbhanga School Safety: बिहार के दरभंगा जिले में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। जाले प्रखंड के राढ़ी पश्चिमी पंचायत के लालपुर टोला स्थित मध्य विद्यालय लालपुर का भवन भीतर से बेहद खतरनाक स्थिति में है। बाहर से भले ही यह स्कूल ठीक-ठाक दिखे, लेकिन अंदर की तस्वीरें चौंकाने वाली हैं। यहां 235 बच्चे जान हथेली पर रखकर पढ़ने को मजबूर हैं, क्योंकि स्कूल की छत से लगातार मलबा गिर रहा है।
विद्यालय के कुल 24 कमरों में से 9 कमरे पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इन कमरों की छत से आए दिन मलबा गिरने के कारण छात्र-छात्राओं के चोटिल होने का डर बना रहता है। प्रभारी एचएम चंदा देवी और अन्य शिक्षकों ने इस गंभीर स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बच्चों के स्कूल आने से लेकर सुरक्षित घर लौटने तक उनकी चिंता बनी रहती है।
रसोईघर बना क्लासरूम, आंगनबाड़ी भी एक ही कमरे में
स्कूल में जर्जर कमरों की हालत इतनी खराब है कि जिन कमरों के दरवाजे ठीक हैं, उनमें ताला लगा दिया गया है। वहीं, जिनके दरवाजे टूट चुके हैं, वहां बच्चों के खेलते समय अंदर चले जाने या छिपने का डर बना रहता है। स्कूल में कुल 235 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें से सामान्य दिनों में 175 से 200 बच्चे उपस्थित रहते हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे महादलित समुदाय से हैं, जिनकी सुरक्षा और शिक्षा दोनों ही दांव पर लगी हैं।
देशज टाइम्स पर तस्वीर देखिए…जर्जर वर्ग कक्ष का छत दिखाती प्रभारी एचएम। विद्यालय का अपना किचेन शेड भी जर्जर हो चुका है ।इस वजह से एक क्लासरूम को रसोईघर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यही नहीं, एक अन्य कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित हो रहा है। भवन के बेतरतीब निर्माण के कारण स्कूल में खेल के मैदान का भी अभाव है, जिससे बच्चों के शारीरिक विकास पर भी असर पड़ रहा है।
प्रभारी एचएम चंदा देवी समेत शिक्षकों ने बताया, “बच्चों के विद्यालय में प्रवेश करने से लेकर सुरक्षित घर लौटने तक चिंता बनी रहती है।”
शिक्षक भी कम, पढ़ाई पर गहरा असर
आठवीं कक्षा तक चलने वाले इस विद्यालय में मात्र चार शिक्षक ही पदस्थापित हैं। इनमें से तीन शिक्षक प्राथमिक संवर्ग के हैं। कक्षा छह से आठ तक के लिए तो चंदा देवी एकमात्र सामाजिक विज्ञान की शिक्षिका हैं, जो प्रभारी एचएम की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
जर्जर भवन, शिक्षकों की भारी कमी, खेल मैदान का अभाव और क्लासरूम में रसोई संचालन जैसी गंभीर समस्याओं ने बच्चों के सर्वांगीण विकास को रोक दिया है। सबसे बड़ा संकट उनकी सुरक्षा पर है। शिक्षकों ने प्रशासन से जर्जर कमरों की तत्काल मरम्मत या उनके पुनर्निर्माण की मांग की है, ताकि इन बच्चों को एक सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक माहौल मिल सके।








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