Bihar Ration Card: बिहार सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी अभियानों में से एक, नए राशन कार्ड बनाने का अभियान, अब खुद विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के विरोध की भेंट चढ़ने की कगार पर है। राज्य में 11 लाख 4 हजार 425 नए बिहार राशन कार्ड जोड़ने का विशाल लक्ष्य तय किया गया है। इसी लक्ष्य को लेकर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और बिहार आपूर्ति सेवा संघ आमने-सामने आ गए हैं।
यह विवाद इतना तीखा हो चुका है कि संघ ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो पूरे राशन कार्ड सिस्टम को ठप किया जा सकता है। इस स्थिति में करोड़ों गरीब परिवारों के हक पर संकट मंडरा रहा है।
क्यों बढ़ा विवाद? संघ के ‘असंभव लक्ष्य’ का आरोप
बिहार आपूर्ति सेवा संघ का आरोप है कि सरकार ने बिना किसी अतिरिक्त संसाधन, पर्याप्त स्टाफ या बजट के अधिकारियों और कर्मचारियों पर ‘असंभव लक्ष्य’ थोप दिया है।
संघ का कहना है कि मौजूदा मैनपावर और बुनियादी सुविधाओं के साथ इतने बड़े लक्ष्य को पूरा करना व्यावहारिक रूप से नामुमकिन है। यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत से जुड़ा मुद्दा है, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ेगा।
आंदोलन की राह पर संघ: क्या ठप होगा काम?
विरोध अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है। बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने साफ संकेत दे दिया है कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो पहले सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। इसके बाद सामूहिक अवकाश और अंत में पूर्ण हड़ताल तक का रास्ता अपनाया जाएगा।
यह स्थिति आने वाले दिनों में नए राशन कार्ड बनाने, उनके सत्यापन और वितरण से जुड़े सभी कामों को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। राज्यभर में राशन कार्ड आवेदन, सुधार और नए कार्ड जारी करने की प्रक्रिया ठप पड़ने का खतरा मंडरा रहा है।
बड़े सवाल यह हैं कि क्या सरकार और खाद्य विभाग संघ की मांगों पर जल्द संज्ञान लेंगे? या फिर बिहार में राशन कार्ड का यह महाअभियान कर्मचारियों के आंदोलन की भेंट चढ़ जाएगा? इस विवाद का समाधान जल्द नहीं हुआ तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।







