Bihar Politics: बिहार की सियासत में इन दिनों नेताओं के प्रति भक्ति और आस्था का एक अनोखा रंग देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मंदिर बनाने का प्रस्ताव सामने आया है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की भगवान की तरह पूजा-अर्चना की जा रही है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है, जो नेताओं के प्रति आमजन की भावना को दर्शाता है।
PM मोदी के मंदिर का भव्य प्रस्ताव, 112 करोड़ का बजट
राजधानी पटना में बिहार राज्य किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. राजन सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित एक भव्य मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस मंदिर के निर्माण के लिए लगभग 112 करोड़ रुपये का बजट और पांच एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। डॉ. सिंह के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री मोदी की आदमकद सोने की प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना शामिल है, जो इस पहल को और भी भव्य बनाती है। यह प्रस्ताव राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच खूब सुर्खियां बटोर रहा है।
लालू यादव को बताया ‘कलयुग का अवतार’, दूध से अभिषेक
एक ओर जहां प्रधानमंत्री के मंदिर की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ वैशाली जिले के भगवानपुर में राजद नेता केदार प्रसाद यादव ने लालू प्रसाद यादव के चित्र की विधिवत पूजा की। उन्होंने लालू यादव को भगवान का रूप बताते हुए 251 किलोग्राम दूध से उनकी तस्वीर का अभिषेक किया। केदार प्रसाद यादव ने लालू यादव को ‘कलयुग का अवतार’ कहा और उनकी तुलना भगवान कृष्ण से की, जो दर्शाता है कि राजद नेता अपने सुप्रीमो के प्रति कितनी गहरी आस्था रखते हैं।
लालू के प्रति केदार यादव की पुरानी आस्था
केदार प्रसाद यादव का नाम पहले भी भगवानपुर में लालू यादव के प्रबल समर्थक के तौर पर सामने आता रहा है। मार्च 2025 में उन्होंने लालू यादव के काफिले का भव्य स्वागत किया था और उन्हें घर की बनी मकई की रोटी और बथुआ का साग भेंट किया था। उस समय उन्होंने खुद को ‘सुदामा’ और लालू यादव को ‘कृष्ण’ बताया था। नवंबर 2023 में भी भगवानपुर के कीरतपुर राजाराम गांव में राजद कार्यकर्ताओं द्वारा लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की प्रतिमाएं स्थापित कर छठ पूजा करने की खबर आई थी। उस कार्यक्रम में भी केदार यादव ने लालू और तेजस्वी को अपने लिए भगवान के समान बताया था, जो उनकी निरंतर भक्ति का प्रमाण है।
बिहार में नेताओं के प्रति इस तरह की अनोखी और गहरी आस्था राजनीतिक विश्लेषकों और आम जनता के बीच बहस का विषय बनी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में इस तरह की पहलें और किस रूप में सामने आती हैं और बिहार की राजनीति पर इनका क्या प्रभाव पड़ता है।








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