Bihar Flood News: बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। खरीक प्रखंड में गंगा नदी के बढ़ते दबाव के कारण काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। जानकारी है कि काजिकोरैया- राघोपुर मार्जिनल तटबंध में दरार आने की खबर रात करीब 2:30 बजे मिली, जिससे बाढ़ का पानी नौगछिया की ओर बढ़ने लगा। अधिकारियों और इंजीनियरों ने आपातकालीन उपाय शुरू किए, जबकि बाढ़ का पानी ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल के घर में घुस गया। अधिकारी लगातार निगरानी और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तत्काल पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत की है। उन्होंने फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध किया, ताकि बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न बाढ़ के खतरे को टाला जा सके।
भागलपुर में बांध पर बढ़ा दबाव, जुलाई से जारी कटाव का खतरा
गंगा नदी में बने टापू (शोल) के कारण नदी की धारा का रुख सीधे बांध की ओर मुड़ गया है। लगातार बढ़ते जलस्तर से बांध पर दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। 23-24 अगस्त की रात को तेज कटाव के बाद राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का लगभग 30 मीटर लंबा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि, जल संसाधन विभाग की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं और फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। खरीक प्रखंड में गंगा नदी के बाएं तट पर लगभग 6.50 किलोमीटर लंबा काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध मौजूद है। मानसून की शुरुआत से ही नदी की मुख्य धारा का इस बांध पर लगातार दबाव बना हुआ था। नदी के बीच में शोल बनने से पानी की धारा बांध से सीधी टकरा रही थी।
26 जुलाई को अंडरमाइनिंग के कारण बांध के D-Nose के पास करीब 110 मीटर लंबाई में कटाव शुरू हुआ था। अगले ही दिन, 27 जुलाई को कटिहार के मुख्य अभियंता और भागलपुर बाढ़ नियंत्रण अंचल के अधीक्षण अभियंता की निगरानी में रात-दिन चले राहत कार्य के बाद सुबह लगभग 4 बजे कटाव पर काबू पा लिया गया था। उस समय बचाव कार्य के तहत 110 मीटर लंबे और 6 मीटर चौड़े NC बेस पर बैंबू रोल और हाथी पांव का इस्तेमाल किया गया था। सुरक्षा के लिए D-Nose के अपस्ट्रीम में 250 मीटर तक, हर 10 मीटर की दूरी पर कुल 25 स्लोपिंग बेड बार भी बनाए गए थे।
युद्धस्तर पर बचाव कार्य जारी, सीएम चौधरी ने संभाली कमान
23 अगस्त की रात से E-Nose के डाउनस्ट्रीम में नदी का दबाव और बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप 24 अगस्त की रात करीब 2 बजे राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का करीब 30 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। पहले कटाव के बाद से ही एक सहायक अभियंता और चार कनीय अभियंताओं की मूल तैनाती के अलावा, शिफ्ट के आधार पर एक अतिरिक्त सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंताओं की टीम भी लगातार काम कर रही है।
17 अगस्त से अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की विशेष टीम लगातार मौके पर कैंप कर स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रही है। क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों किनारों को स्थिर करने और पानी के फैलाव को रोकने के लिए रिंग बांध का निर्माण शुरू कर दिया गया है। राहत कार्य में लगभग 2.50 लाख बालू भरी बोरियां, 20 नावें, 16 ट्रैक्टर, एक पोकलेन, दो जेसीबी और करीब 250 मजदूर लगाए गए हैं। ये मजदूर और विभागीय टीमें दिन-रात काम कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द स्थिति को सामान्य किया जा सके।
फरक्का बराज के गेट खोलने की अपील, प्रशासन अलर्ट
भागलपुर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) खुद मौके का निरीक्षण कर रहे हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट हैं। गंगा के जलश्राव की तेजी से निकासी सुनिश्चित करने के लिए फरक्का बराज के महाप्रबंधक (GM) को पत्र भेजा गया है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत कर फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध किया है। प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है।
बिहार में गंगा का कहर! बांध टूटने के बाद CM सम्राट् चौधरी का इमरजेंसी एक्शन, जानिए क्या हुआ?
Bihar Flood News: बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी के बढ़ते दबाव ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। खरीक प्रखंड में काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। नदी में बने टापू (शोल) के कारण पानी की धारा का रुख सीधे बांध की ओर मुड़ गया था, जिसके चलते लगातार बढ़ते जलस्तर ने बांध पर भारी दबाव डाला।
तेज कटाव के बाद 23-24 अगस्त की रात को राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का लगभग 30 मीटर लंबा हिस्सा टूट गया। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए जल संसाधन विभाग की टीमें युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। फिलहाल प्रशासन का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने के लिए तेजी से काम जारी है।
गंगा का कहर: बांध क्यों और कैसे टूटा?
भागलपुर के खरीक प्रखंड में गंगा नदी के बाएं तट पर लगभग 6.50 किलोमीटर लंबा काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध बना हुआ है। मानसून की शुरुआत से ही नदी की मुख्य धारा का बांध पर लगातार दबाव बना हुआ था। नदी के बीच में टापू बनने के कारण पानी की धारा सीधे बांध की ओर प्रवाहित होने लगी थी। जलस्तर बढ़ने के साथ ही अंडरमाइनिंग की वजह से बांध के D-Nose के पास 26 जुलाई को करीब 110 मीटर लंबाई में कटाव शुरू हो गया था।
इस पहले कटाव को नियंत्रित करने के लिए 27 जुलाई को कटिहार के मुख्य अभियंता और भागलपुर बाढ़ नियंत्रण अंचल के अधीक्षण अभियंता की निगरानी में रात-दिन बचाव कार्य चलाकर सुबह करीब 4 बजे उस पर काबू पाया गया था। उस समय 110 मीटर लंबे और 6 मीटर चौड़े NC बेस पर बैंबू रोल और हाथी पांव का इस्तेमाल किया गया था। सुरक्षा के लिए D-Nose के अपस्ट्रीम में 250 मीटर तक हर 10 मीटर की दूरी पर कुल 25 स्लोपिंग बेड बार भी बनाए गए थे।
युद्धस्तर पर बचाव कार्य: प्रशासन ने क्या-क्या किया?
23 अगस्त की रात से E-Nose के डाउनस्ट्रीम में नदी का दबाव और बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप 24 अगस्त की रात करीब 2 बजे राघोपुर बांध-सह-रेलवे टैगिंग बांध का करीब 30 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। पहले कटाव के बाद से ही एक सहायक अभियंता और चार कनीय अभियंताओं की मूल तैनाती के अलावा, शिफ्ट के आधार पर एक अतिरिक्त सहायक अभियंता और दो कनीय अभियंताओं की टीम भी लगाई गई थी।
17 अगस्त से अधीक्षण अभियंता, कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता की विशेष टीम लगातार मौके पर कैंप कर स्थिति की निगरानी कर रही है। क्षतिग्रस्त हिस्से के दोनों किनारों को स्थिर करने और पानी के फैलाव को रोकने के लिए रिंग बांध का निर्माण शुरू कर दिया गया है। राहत कार्य में करीब 2.50 लाख बालू भरी बोरियां, 20 नावें, 16 ट्रैक्टर, एक पोकलेन, दो जेसीबी और लगभग 250 मजदूर दिन-रात काम कर रहे हैं। भागलपुर के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) खुद मौके का निरीक्षण कर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सीएम सम्राट् चौधरी की पहल: फरक्का बराज पर तुरंत एक्शन
गंगा के बढ़ते जलश्राव की तेजी से निकासी सुनिश्चित करने के लिए फरक्का बराज के महाप्रबंधक (GM) को पत्र भेजा गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री सम्राट् चौधरी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री से फोन पर बातचीत की है और उनसे फरक्का बराज के सभी गेट खोलने का अनुरोध किया है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट हैं।
प्रशासन का दावा है कि ‘फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और बांध के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने के लिए युद्धस्तर पर काम जारी है।’
यह पहल बाढ़ के खतरे को कम करने और प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। विभागीय टीमें और स्थानीय प्रशासन मिलकर इस चुनौती का सामना कर रहे हैं ताकि Bihar Flood News से जुड़ी किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।







