Bihar Shravani Mela: बिहार के मुख्यमंत्री बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्रावणी मेले को करोड़ों लोगों की आस्था, एकता और संकल्प का अद्भुत प्रतीक बताया है। उन्होंने रविवार, 23 अगस्त को लोक
सेवक स्थित ‘संकल्प’ सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भागलपुर जिले के सुल्तानगंज की धानिक बेलारी पंचायत में आयोजित श्रावणी मेला कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर सुल्तानगंज में एक भव्य ड्रोन शो का भी आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों का मन मोह लिया।
श्रावणी मेला: आस्था और एकता का संगम
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्रावणी मेला की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला एक विशाल पर्व है।
भागलपुर, बांका और मुंगेर जिलों में लगभग 100 किलोमीटर की इस पवित्र कांवर यात्रा से हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में जुड़ा होता है। यह यात्रा सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि का भी प्रतीक है, जहां भक्तजन पूरी श्रद्धा के साथ भगवान शिव की आराधना में लीन होते हैं।
श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, एकता और संकल्प का अद्भुत प्रतीक है।
— सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री, बिहार
कांवर यात्रा: विश्व के सबसे बड़े समाजवाद का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ने वाले कांवरियों की यात्रा को ‘विश्व के सबसे बड़े समाजवाद’ का उदाहरण बताया। उन्होंने समझाया कि इस यात्रा में एक ही बोली (‘बोल बम’), एक ही कपड़ा और एक ही लक्ष्य होता है – भगवान शिव को जल अर्पित करना।
यह दिखाता है कि कैसे धार्मिक भावनाएं लोगों को एकजुट करती हैं, जात-पात और भेद-भाव भुलाकर सभी एक समान हो जाते हैं। इस कठिन पैदल यात्रा के दौरान स्थानीय लोग भी पूरी श्रद्धा और निःस्वार्थ भाव से कांवरियों की सेवा करते हैं, जो इस आयोजन की सामाजिक समरसता को और मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री का संदेश: सुल्तानगंज से बाबा धाम तक
श्री चौधरी ने कहा कि इस यात्रा में श्रद्धालु पैदल चलकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं, जो उनकी अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक ताने-बाने को भी सशक्त करती है।
श्रावणी मेला हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है, जिससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। मुख्यमंत्री का यह संबोधन इस विशाल आयोजन के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और सम्मान को भी उजागर करता है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का बड़ा बयान: श्रावणी मेला सिर्फ धर्म नहीं, करोड़ों लोगों का संकल्प!
Bihar Shravani Mela: पटना: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने श्रावणी मेले को सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, एकता और संकल्प का अद्भुत प्रतीक बताया है। रविवार, 23 अगस्त 2026 को उन्होंने इस महत्वपूर्ण मेले के आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने यह बयान लोक सेवक स्थित ‘संकल्प’ सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिया, जब वे भागलपुर जिला के सुल्तानगंज स्थित धानिक बेलारी पंचायत में आयोजित श्रावणी मेला कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर सुल्तानगंज में एक भव्य ड्रोन शो का भी आयोजन किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
श्रावणी मेला: आस्था का संगम और सबसे बड़ा समाजवाद
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रावणी मेला एक अनूठी परंपरा है, जिसमें भागलपुर, बांका और मुंगेर जिलों में लगभग 100 किलोमीटर की यात्रा में हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में जुड़ता है। उन्होंने इस यात्रा को विश्व के सबसे बड़े समाजवाद का उदाहरण बताया, जहां सभी कांवरिया एक ही बोली, एक ही कपड़े और एक ही लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं।
श्रावणी मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, एकता और संकल्प का अद्भुत प्रतीक है।
श्री चौधरी ने बताया कि सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर शिवभक्त कांवरिया ‘बोल बम’ के नारे के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं और भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। यह कठिन पैदल यात्रा श्रद्धालु पूरी भक्ति भावना के साथ करते हैं, और इस दौरान क्षेत्र के लोग पूरी श्रद्धा के साथ उनकी सेवा में लगे रहते हैं। मुख्यमंत्री ने इस मेले को बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग बताया, जो सामाजिक सौहार्द और एकजुटता का संदेश देता है।
कांवर यात्रा: सहभागिता और सेवा का अनुपम उदाहरण
श्रावणी मेला केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सहभागिता और सेवा का एक विशाल नेटवर्क भी तैयार करता है। लाखों कांवरिया अपनी शारीरिक सीमाओं को पार करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम तक पहुंचते हैं, और स्थानीय लोग उनकी हरसंभव सहायता करते हैं। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का मार्ग है, बल्कि यह समाज में सेवा भाव और भाईचारे को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह अनूठी परंपरा हर साल लाखों लोगों को एक सूत्र में पिरोती है, जिससे एकता और संकल्प की भावना प्रबल होती है।








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