Bihar Congress: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों में देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियां जुटी हुई हैं। इस बीच, बिहार कांग्रेस के भीतर से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं, जो पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं। बिहार कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने ही हाईकमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अगले महीने 8 सितंबर को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय इंदिरा भवन के सामने धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
बिहार कांग्रेस के नेता क्यों हुए उग्र?
इन नेताओं की मुख्य मांग है कि बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार को उनके पदों से हटाया जाए। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद से ही पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा था। कई नेता टिकट वितरण की प्रक्रिया और संगठन की कार्यशैली से नाराज बताए जा रहे हैं।

खगड़िया के पूर्व विधायक छत्रपति यादव सहित कई नेताओं ने आरोप लगाया है कि मौजूदा नेतृत्व के कारण बिहार में कांग्रेस लगातार कमजोर हुई है। उनका कहना है कि बिहार कांग्रेस इस समय संक्रमणकाल से गुजर रही है और इस स्थिति के लिए प्रभारी कृष्णा अल्लावरु तथा प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
राहुल गांधी से मुलाकात का समय न मिलने पर भी नाराजगी
असंतुष्ट नेताओं में इस बात को लेकर भी नाराजगी है कि उन्हें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से मुलाकात का समय नहीं मिल पाया है। यह स्थिति पार्टी के भीतर गहराते मतभेदों को और उजागर करती है। उल्लेखनीय है कि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल 6 सीटों पर सिमट गई थी, जिसके बाद से ही प्रदेश पार्टी नेतृत्व के खिलाफ असंतोष बढ़ता चला गया।
इस विरोध प्रदर्शन से कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बढ़ने की संभावना है। पार्टी के भीतर यह आंतरिक कलह आगामी चुनावों में उसकी रणनीति और प्रदर्शन पर सीधा असर डाल सकती है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति से कैसे निपटता है और क्या असंतुष्ट नेताओं की मांगों पर कोई विचार किया जाता है।







