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बिहार में CBI की शक्तियों पर लगाम! अब बिना इजाजत नहीं कर पाएगी जांच, जानें पूरा फैसला – किसे मिली राहत!

Bihar CBI: राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अब केंद्रीय एजेंसी सीधे कार्रवाई नहीं कर पाएगी। गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर सभी पुरानी व्यवस्थाओं को रद्द किया।

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Bihar CBI: बिहार सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकार क्षेत्र को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जिसके तहत अब राज्य में केंद्रीय एजेंसी की सीधी जांच पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस निर्णय के बाद, बिहार सरकार के लोकसेवकों, राज्य के स्वामित्व या नियंत्रण वाले विभागों, निगमों, कंपनियों, बैंकों और राज्य से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले संस्थानों के कर्मियों के खिलाफ CBI सीधे आपराधिक जांच शुरू नहीं कर सकेगी।इन सभी मामलों में जांच शुरू करने से पहले CBI को बिहार सरकार से अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी। इस संबंध में गृह विभाग (आरक्षी शाखा) की ओर से 3 सितंबर को एक अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें यह नई व्यवस्था स्पष्ट कर दी गई है। यह नई अधिसूचना इस विषय पर पहले जारी सभी अधिसूचनाओं का स्थान लेगी, जिसका अर्थ है कि राज्य कर्मियों से जुड़े हर मामले में अब अलग-अलग अनुमति लेना आवश्यक होगा।

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बिहार में CBI की पावर पर लगा ब्रेक! सम्राट सरकार ने बदल दिए जांच के नियम, जानें किसे मिली राहत

Bihar Government: बिहार में सीबीआई (CBI) की जांच शक्तियों को लेकर बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सम्राट सरकार ने राज्य में केंद्रीय जांच ब्यूरो की सीधी कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। अब राज्य सरकार के कर्मचारियों और राज्य से जुड़े संस्थानों के मामलों में सीबीआई सीधे जांच शुरू नहीं कर पाएगी। इसके लिए पहले राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

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राज्य कर्मचारियों पर CBI जांच के बदले नियम

गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। प्रधान सचिव पंकज कुमार ने यह अधिसूचना जारी करते हुए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा-6 के तहत सीबीआई की जांच शक्तियों का दायरा स्पष्ट कर दिया है। यह फैसला राज्य के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव लाएगा।नई व्यवस्था के तहत, बिहार सरकार के अधीन कार्यरत लोक सेवकों के खिलाफ सीबीआई को सीधे जांच शुरू करने की अनुमति नहीं होगी। किसी भी जांच के लिए राज्य सरकार की पूर्व सहमति लेना आवश्यक होगा। यह नियम सिर्फ सरकारी कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य सरकार के नियंत्रण वाले निगमों, कंपनियों और बैंकों पर भी लागू होगा। इसके अतिरिक्त, सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले संस्थानों के कर्मचारियों को भी इस नए दायरे में शामिल किया गया है।

गृह विभाग (आरक्षी शाखा) के प्रधान सचिव पंकज कुमार द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा-6 के तहत सीबीआई की जांच शक्तियों का दायरा स्पष्ट किया गया है। अब राज्य सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामलों में सीधी जांच नहीं हो सकेगी।

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प्रस्ताव भेजने के बाद ही मिलेगी मंजूरी

राज्य सरकार से जुड़े किसी भी मामले की जांच के लिए सीबीआई को पहले एक औपचारिक प्रस्ताव भेजना होगा। इस प्रस्ताव पर राज्य सरकार विस्तृत समीक्षा करेगी। जांच की अनुमति दी जानी है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय हर मामले की प्रकृति के आधार पर किया जाएगा। इस अधिसूचना की प्रति केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय, सीबीआई निदेशक, बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) और संबंधित विभागों को भी भेजी गई है।

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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए अलग है व्यवस्था

हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से जुड़े मामलों में सीबीआई को जांच की सहमति पहले की तरह ही रहेगी। उनसे जुड़े निजी व्यक्तियों के मामले भी इसके दायरे में होंगे। भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईटी एक्ट से संबंधित मामलों में यह व्यवस्था लागू रहेगी। इस नई गाइडलाइन से राज्य सरकार और सीबीआई के बीच जांच प्रक्रिया और अधिकारों का दायरा अब पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गया है, जिससे राज्य के प्रशासनिक दायरे वाले कर्मचारियों और संस्थानों के खिलाफ सीबीआई जांच की प्रक्रिया बदल जाएगी।

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राज्य कर्मियों की जांच के लिए CBI को लेनी होगी इजाजत

अधिसूचना में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि निम्नलिखित मामलों में CBI को राज्य सरकार की पूर्व सहमति लेनी होगी:

  • बिहार सरकार के अधीन काम करने वाले लोकसेवक।
  • राज्य सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाले विभाग, निगम, कंपनी या बैंक के कर्मचारी।
  • ऐसे संस्थान जिनको बिहार सरकार से वित्तीय सहायता मिलती है या मिली है।

इसका सीधा मतलब है कि राज्य सरकार के कामकाज से जुड़े मामलों में CBI अब बिना इजाजत अपनी जांच आगे नहीं बढ़ा सकेगी। अनुमति मिलने के बाद ही केंद्रीय जांच ब्यूरो आगे की कार्रवाई कर पाएगा।

केंद्र सरकार के मामलों में CBI को सामान्य सहमति

हालांकि, इसी अधिसूचना में केंद्र सरकार से जुड़े मामलों के लिए सामान्य सहमति प्रदान की गई है। भारत सरकार के कर्मचारियों, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (PSU) के कर्मियों और उनसे जुड़े निजी व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज मामलों में CBI को राज्य सरकार से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। राज्य की सीमा के भीतर ऐसे मामलों में CBI अपनी शक्तियों का उपयोग पहले की तरह कर सकती है।इस फैसले से राज्य सरकार के कर्मचारियों और बिहार में कार्यरत राज्य-नियंत्रित संस्थानों के खिलाफ होने वाली CBI जांच की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आएगा। यह कदम राज्य के भीतर केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज पर नियंत्रण स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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