Bihar Flood Project: हर साल बिहार में गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियां अपना रौद्र रूप दिखाती हैं, जिससे एक बड़ी आबादी को बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ती है। अब राज्य सरकार ने इस पुरानी मुसीबत से निपटने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार बाढ़ आने के बाद राहत पहुंचाने के बजाय, बाढ़ के खतरे को स्थायी रूप से कम करने के लिए निर्णायक इंतजामों की तैयारी में है।
राज्य सरकार ने केंद्र के सामने अपनी मांग मजबूती से रखने का फैसला किया है। ‘फ्लड मैनेजमेंट एंड बॉर्डर एरिया प्रोग्राम’ (एफएमबीएपी) के तहत, बिहार सरकार केंद्रीय बजट में अधिक प्रावधान चाहती है। सरकार का तर्क है कि बिहार का लगभग 73 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र हर साल बाढ़ की चपेट में आता है, जिससे भारी नुकसान होता है।
बिहार बाढ़ परियोजना: 2027-28 के बजट में शामिल होंगी 3 अहम योजनाएं
बिहार सरकार ने केंद्रीय बजट 2027-28 में तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को शामिल कराने की तैयारी की है। इन परियोजनाओं का मुख्य फोकस सिर्फ बाढ़ नियंत्रण ही नहीं, बल्कि सिंचाई और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है।
पहली परियोजना: इंद्रपुरी जलाशय से सोन नहर को स्थिरता
इंद्रपुरी जलाशय परियोजना को सोन नहर प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सोन नहर प्रणाली को लंबे समय तक स्थिरता प्रदान करना है। बिहार और झारखंड के बीच पानी के बंटवारे को लेकर पहले ही समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। अब राज्य सरकार उम्मीद कर रही है कि आगामी केंद्रीय बजट में इस परियोजना के लिए आवश्यक धनराशि आवंटित की जाएगी।
दूसरी परियोजना: सोन का पानी पहुंचेगा फल्गु तक, गया-औरंगाबाद को मिलेगा लाभ
सोन-फल्गु रिवर लिंक परियोजना के तहत, सोन नदी के पानी को पाइपलाइन और नहरों के माध्यम से फल्गु नदी तक पहुंचाया जाएगा। इस योजना का सीधा लाभ गया और औरंगाबाद के सूखाग्रस्त इलाकों को मिलने की उम्मीद है। इससे सिंचाई के साथ-साथ पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए भी पानी उपलब्ध होगा। यह परियोजना फल्गु नदी में पूरे साल पानी बनाए रखने की दिशा में भी अहम साबित हो सकती है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए केंद्र से लगभग 996 करोड़ रुपये की मांग की गई है।
तीसरी परियोजना: सारण जिले को बाढ़ से राहत और विकास
सारण जिले के लिए बाढ़ नियंत्रण और जल निकासी परियोजना का पहला चरण प्रस्तावित है, जिसकी अनुमानित लागत 1350.95 करोड़ रुपये है। इस परियोजना में जल निकासी चैनलों का नवीनीकरण, नए रेगुलेटरों का निर्माण और अन्य आवश्यक संरचनाओं का विकास शामिल है। इससे सारण में बाढ़ का असर कम होगा और हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि सुरक्षित रहेगी। इसके अतिरिक्त, इस परियोजना से सोनपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, एयरोसिटी और आसपास के शहरी इलाकों को भी बाढ़ से सुरक्षा और विकास का लाभ मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों की तस्वीर बदल जाएगी और लाखों लोगों को स्थायी राहत मिलेगी।
इन तीनों बड़ी परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन से बिहार में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान होने के साथ-साथ कृषि, पेयजल और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिलेगी।







