Bihar Flood: राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार में बाढ़ से किसानों को हुए भारी नुकसान पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक पत्र लिखा है, जिसमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण कराने और किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई है। सांसद ने बक्सर, कैमूर और रोहतास जैसे जिलों का विशेष उल्लेख किया है, जहां बाढ़ का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है।
सिंह ने अपने पत्र में बताया है कि गंगा, गंडक, कोसी, सोन और दुर्गावती सहित कई प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने से खेतों में पानी भर गया है। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसानों की धान, मक्का, सब्जी और दलहन जैसी महत्वपूर्ण फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलें सड़ गई हैं, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।
बाढ़ ने छीनी किसानों की उम्मीदें
“किसानों ने इस सीजन की फसल पर अपनी गाढ़ी कमाई लगाई थी। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर हुए खर्च के बाद उन्हें फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन खेतों में पानी भर जाने से उनकी सारी उम्मीदें टूट गई हैं।”
बिहार के कई हिस्सों में बाढ़ का असर कृषि क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है। नदियों के किनारे बसे गांवों में पानी घुसने से खेत जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर तो तैयार फसलें पानी में पूरी तरह डूब गई हैं। इस आपदा ने उन किसानों की चिंता बढ़ा दी है, जिन्होंने अपनी सारी पूंजी इस फसल में लगा दी थी।
निष्पक्ष सर्वेक्षण और त्वरित मुआवजे की मांग
सुधाकर सिंह ने उपमुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि बक्सर, कैमूर और रोहतास के साथ-साथ राज्य के अन्य सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी फसल नुकसान का आकलन युद्धस्तर पर कराया जाए। उन्होंने विशेष रूप से गंगा, गंडक, कोसी, सोन और दुर्गावती नदियों के आसपास के इलाकों में व्यापक सर्वेक्षण की मांग की है।
सांसद ने जोर देकर कहा कि सर्वेक्षण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। वास्तविक नुकसान का आकलन कर किसानों के खेतवार नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसके बाद पात्र किसानों को फसल क्षति का मुआवजा देने में किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
आर्थिक संकट और अगली फसल की तैयारी
बाढ़ के कारण फसल खराब होने से केवल वर्तमान आय पर ही नहीं, बल्कि किसानों की अगली फसल की तैयारी पर भी गहरा असर पड़ता है। नष्ट हुई फसलों से होने वाली आय पर ही किसान बीज, खाद और खेती से जुड़ी अन्य जरूरतों के लिए निर्भर रहते हैं। ऐसे में फसल के बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।
सांसद सुधाकर सिंह ने उपमुख्यमंत्री से अपील की है कि बाढ़ प्रभावित जिलों, प्रखंडों और पंचायतों में युद्धस्तर पर फसल क्षति सर्वेक्षण कराया जाए और वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को उचित मुआवजा व राहत राशि उपलब्ध कराई जाए। समय पर मिलने वाली यह सहायता किसानों को अगली कृषि गतिविधियों को जारी रखने में मदद करेगी और उन्हें इस मुश्किल दौर से उबरने में संबल प्रदान करेगी।







