Darbhanga Arms Act: बिहार में अपराध पर नकेल कसने के लिए जारी पुलिस कार्रवाई के बीच, दरभंगा में अवैध हथियार रखने के मामले में दो दोषियों को दो-दो साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। दरभंगा पुलिस की प्रभावी जांच और मजबूत अभियोजन के परिणामस्वरूप, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने यह कठोर फैसला सुनाया है, जो अवैध हथियारों के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।
कैसे पकड़े गए आरोपी और क्या था पूरा मामला?
यह मामला 27 अगस्त 2024 का है, जब लहेरियासराय थाना के फरार नामजद अभियुक्त मो. अकबर की गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही थी। इसी अभियान के दौरान, पुलिस ने मो. अकबर और केशव कुमार कश्यप को एक देशी पिस्टल के साथ धर दबोचा। मो. अकबर, मो. इस्लाम का बेटा है और बाकरगंज अभंडा पोखर, थाना लहेरियासराय का निवासी है। वहीं, केशव कुमार कश्यप, लाल बाबू सहनी का बेटा और बहादुरपुर का निवासी है।
पुलिस ने तत्काल हथियार जब्त कर दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत लहेरियासराय थाना में प्राथमिकी दर्ज की थी। अनुसंधान पूरा होने के बाद, पुलिस ने त्वरित रूप से न्यायालय में आरोपपत्र समर्पित किया, जिससे इस मामले में तेजी से कार्रवाई हो सकी।
दरभंगा कोर्ट ने सुनाई कितनी सजा और जुर्माना?
प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर, दरभंगा कोर्ट के सीजेएम ने मो. अकबर को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)ए/35 के तहत दोषी पाया। उन्हें दो वर्ष के सश्रम कारावास और 3,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। यदि मो. अकबर जुर्माना नहीं भर पाते हैं, तो उन्हें तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
इस मामले में अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप दोषियों को सजा मिल पाई।
इसी तरह, केशव कुमार कश्यप को आर्म्स एक्ट की धारा 26(1)/35 के तहत दोषी ठहराया गया। केशव को भी दो वर्ष के सश्रम कारावास और 3,000 रुपये के जुर्माने की सजा मिली है। जुर्माना न देने की स्थिति में, उन्हें भी तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा। यह फैसला बिहार में अवैध हथियारों के खिलाफ कानून के सख्त रुख को दर्शाता है और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने में सहायक सिद्ध होगा।







