Bihar Snakebite Death: बिरौल थाना क्षेत्र के सहसराम पंचायत अंतर्गत अखाड़ गांव में सर्पदंश का शिकार हुए एक युवक की समय पर इलाज न मिलने के कारण दर्दनाक मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल ले जाने की बजाय करीब आठ घंटे तक झाड़-फूंक के लिए ओझा का सहारा लिया, जिसका खामियाजा युवक को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ा। बिहार में अंधविश्वास के चलते हुई इस घटना ने एक बार फिर आधुनिक चिकित्सा के महत्व को रेखांकित किया है।
अंधविश्वास ने ली 29 वर्षीय धमेंद्र की जान
मृतक की पहचान सहसराम पंचायत के वार्ड नंबर पांच निवासी पलटन मांझी के 29 वर्षीय पुत्र धमेंद्र मांझी के रूप में हुई है। धमेंद्र मजदूरी करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके परिवार में पत्नी पूनम देवी, दो पुत्र और एक पुत्री समेत तीन छोटे बच्चे हैं। इस घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और आर्थिक संकट गहरा गया है।
परिजनों के अनुसार, शुक्रवार रात धमेंद्र अपने कमरे में जमीन पर बिस्तर बिछाकर सो रहा था। इसी दौरान सोते हुए एक सांप ने उसकी कमर में डंस लिया। सांप के काटने की जानकारी मिलते ही परिवार के लोग घबरा गए और उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की बजाय गांव के एक ओझा के पास ले गए।
आठ घंटे तक चलता रहा झाड़-फूंक का खेल
धमेंद्र के परिजन ने बताया, ‘सांप के काटने के बाद हम उसे पहले ओझा के पास ले गए, जहां कुछ देर झाड़-फूंक के बाद उसे घर भेज दिया गया। तबीयत बिगड़ने पर हम उसे दोबारा ओझा के पास ले गए। शनिवार सुबह करीब सात-आठ बजे तक लगातार धुनी रमाकर झाड़-फूंक की जाती रही।’
लंबे समय तक झाड़-फूंक चलने के बावजूद जब धमेंद्र की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि वह बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा, तब ओझा ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद स्थानीय लोगों की सलाह पर परिजन उसे बहेड़ा पीएचसी लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद, धमेंद्र की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (DMCH) रेफर कर दिया।
डीएमसीएच पहुंचते ही चिकित्सकों ने किया मृत घोषित
दुखद बात यह रही कि डीएमसीएच में भर्ती होते ही चिकित्सकों ने धमेंद्र को मृत घोषित कर दिया। आठ घंटे तक झाड़-फूंक में उलझे रहने और सही समय पर इलाज न मिलने के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। सूचना मिलने पर बेंता थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर उसे परिजनों को सौंप दिया। पति की मौत से पत्नी पूनम देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के कमाने वाले सदस्य की असमय मौत ने उनके सामने अब जीवन-यापन का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और आधुनिक चिकित्सा के प्रति जागरूकता की कमी को उजागर करती है, जिसके कारण आए दिन ऐसी हृदय विदारक घटनाएं सामने आती हैं।







