Patna Consumer Court: फ्लाइट में बार-बार देरी के कारण कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने और एयरलाइन द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था न करने के मामले में पटना जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने स्पाइसजेट को एक यात्री को 85,816 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस मुआवजे में यात्रा के दौरान हुए खर्च के लिए 15,816 रुपये, मानसिक उत्पीड़न के लिए 50,000 रुपये और मुकदमेबाजी की लागत के लिए 20,000 रुपये शामिल हैं। आयोग ने एयरलाइन को 19 अप्रैल, 2021 से, जिस दिन शिकायत दर्ज की गई थी, 15,816 रुपये की खर्च राशि पर 12% वार्षिक ब्याज का भुगतान करने का भी निर्देश दिया है। यदि तीन महीने के भीतर आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो ब्याज दर बढ़कर 15% प्रति वर्ष हो जाएगी।
फ्लाइट में देरी बनी बड़ी मुसीबत
यह मामला 2021 में वरिष्ठ नागरिक दिलीप कुमार अग्रवाल द्वारा दायर किया गया था। उन्होंने 16 जनवरी, 2021 को अपने परिवार के तीन सदस्यों के लिए पटना से मुंबई होते हुए मंगलुरु तक के टिकट बुक किए थे, जिनकी कीमत लगभग 18,697 रुपये थी। पटना-मुंबई फ्लाइट में बार-बार देरी होने के कारण परिवार की मुंबई से मंगलुरु की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई। शिकायत के अनुसार, बार-बार अनुरोध के बावजूद स्पाइसजेट ने कोई वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था नहीं की। अग्रवाल को अपने बेटे की मेडिकल काउंसलिंग में शामिल होना था, जिसके बाद उन्हें अपने खर्च पर दूसरी एयरलाइन से नए टिकट खरीदने पड़े।

एयरलाइन का तर्क खारिज, यात्री को राहत
स्पाइसजेट ने आयोग को बताया कि देरी दिल्ली में खराब मौसम की स्थिति के कारण हुई थी। एयरलाइन ने तर्क दिया कि जब देरी खराब मौसम जैसी असाधारण परिस्थितियों के कारण होती है, तो उसे मुआवजे के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, आयोग ने पाया कि एयरलाइन उस विशेष फ्लाइट में खराब मौसम के कारण देरी होने के संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज पेश करने में विफल रही। आयोग ने यह भी गौर किया कि यात्री को लंबे इंतजार के दौरान भोजन या जलपान भी उपलब्ध नहीं कराया गया था।
पटना उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा, “एयरलाइन खराब मौसम के कारण देरी के संबंध में कोई विश्वसनीय सबूत पेश नहीं कर पाई। यात्री को भोजन या जलपान भी नहीं दिया गया, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।”
खर्चों में यात्रा और होटल का किराया शामिल
अग्रवाल ने वैकल्पिक हवाई टिकट, होटल आवास और परिवहन पर हुए खर्चों के साथ-साथ मंगलुरु में पहले से बुक किए गए होटल में हुए नुकसान से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए। आयोग ने कुल पात्र खर्चों का आकलन 20,205 रुपये किया और एयरलाइन द्वारा पहले ही वापस किए गए 4,389 रुपये की राशि घटा दी। इसलिए, उसने स्पाइसजेट को 15,816 रुपये की प्रतिपूर्ति का आदेश दिया। अग्रवाल ने मानसिक पीड़ा के लिए 3 लाख रुपये की मांग की थी। आयोग ने इस दावे को अत्यधिक मानते हुए इसके बजाय 50,000 रुपये और मुकदमेबाजी की लागत के लिए 20,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। यह फैसला उन यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है, जिन्हें फ्लाइट में देरी के कारण असुविधा का सामना करना पड़ता है।







