Gandhi Film Festival Patna: बिहार की राजधानी पटना के गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में बुधवार को तीन दिवसीय गांधी फिल्म महोत्सव का शानदार आगाज हुआ। इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य सिनेमा के माध्यम से महात्मा गांधी के जीवन, दर्शन और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। फिल्म निर्माताओं, आलोचकों, शिक्षाविदों और दर्शकों को एक मंच पर लाने वाला यह आयोजन बापू के विचारों को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
गांधी और सिनेमा पर विशेष चर्चा
बापू टावर के पहले तल पर स्थित सभागार में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन विभाग के सचिव प्रणव कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर महोत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर अतिथियों का गुलदस्ते, स्मृति चिन्ह, शॉल और पुस्तकों से स्वागत किया गया। पहले सत्र में “गांधी और फिल्म” विषय पर एक विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। बापू टावर के निदेशक विनय कुमार ने स्वागत भाषण दिया और महोत्सव के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला, जिसमें गांधीवादी आदर्शों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सिनेमा के महत्व को रेखांकित किया गया।
बापू के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाता सिनेमा
सचिव प्रणव कुमार ने बताया कि सिनेमा ने गांधीजी के जीवन, दर्शन और संदेशों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गांधीजी ने अपने शुरुआती दिनों से ही सिनेमा को प्रभावित किया है और उनके विचारों पर आधारित फिल्में आज भी बन रही हैं। इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर), पटना की क्षेत्रीय निदेशक स्वाधा रिजवी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं सिने सोसाइटी के अध्यक्ष आर.एन. दास ने भी इस दौरान अपने विचार साझा किए।
तीन दिनों में होंगी सात फिल्मों की स्क्रीनिंग
प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम ने मुख्य वक्ता के रूप में “गांधी और फिल्म” पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि गांधीजी का जीवन एक सिनेमाई कैनवास की तरह है, जिसने भारत और दुनिया भर के फिल्म निर्माताओं को प्रेरित किया है। गांधी संग्रहालय के सचिव और कार्यक्रम के अध्यक्ष रजी अहमद ने अपने अध्यक्षीय भाषण में गांधीवादी मूल्यों की निरंतर प्रासंगिकता पर बात की। महोत्सव के पहले दिन दो फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। सुबह 11 बजे रिचर्ड एटनबरो की ऑस्कर विजेता फिल्म ‘गांधी’ (1982) दिखाई गई, जिसके बाद दोपहर 3 बजे ‘गांधी – प्रॉफिट ऑफ द 20थ सेंचुरी’ (1940) की स्क्रीनिंग हुई।
महोत्सव के दूसरे दिन, 10 सितंबर को, सुबह के सत्र में ‘महात्मा गांधी टॉक्स’ (1931) और दोपहर में ‘ए बाउंडलेस आइडिया’ (1970) का प्रदर्शन किया जाएगा, जो गांधीवादी दर्शन की पड़ताल करती है।
महोत्सव का समापन 11 सितंबर को तीन फिल्मों के प्रदर्शन के साथ होगा। सुबह 11 बजे ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ (2005) दिखाई जाएगी, जो आधुनिक संदर्भ में गांधी के विचारों की प्रासंगिकता की पड़ताल करती है। कार्यक्रम में ‘नोआखली एक्सट्रैक्ट्स’ (1946) और ‘साउथ इंडिया टूर ऑफ महात्मा गांधी’ (1946) जैसे ऐतिहासिक फुटेज भी शामिल होंगे।
कार्यक्रम का संचालन बापू टावर के अवर सचिव अरुण कुमार पाठक ने किया, जबकि बापू टावर के उप निदेशक ललित कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस उद्घाटन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, आम जनता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
यह गांधी फिल्म महोत्सव पटना के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण घटना है, जो न केवल गांधीजी के जीवन और संदेशों को जीवंत करेगा बल्कि युवा पीढ़ी को उनके सिद्धांतों से जुड़ने और प्रेरणा लेने का अवसर भी प्रदान करेगा। आने वाले दिनों में यह महोत्सव गांधीवादी मूल्यों के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित हो सकता है।








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