Muzaffarpur Police: मुजफ्फरपुर पुलिस में बड़ी कार्रवाई हुई है। एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने कर्तव्य में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में पारू और औराई के थानाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कड़े कदम से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की गई है, जिससे पुलिसकर्मियों के बीच स्पष्ट संदेश गया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पारू थानाध्यक्ष पर गंभीर लापरवाही का आरोप
पारू के थानाध्यक्ष, पुअनि आशुतोष कुमार शुक्ला के खिलाफ अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सरैया और अंचल पुलिस निरीक्षक, पारू ने एक विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा था। इसमें आरोप लगाया गया कि मध्यस्थता के बाद पूछताछ के लिए थाने लाए गए एक व्यक्ति को वरीय पदाधिकारी को सूचित किए बिना ही छोड़ दिया गया। यह एक गंभीर प्रोटोकॉल उल्लंघन माना गया है।
इसके साथ ही, आशुतोष कुमार शुक्ला पर चोरी की संपत्ति, आर्म्स एक्ट और बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम से जुड़े मामलों के आरोपितों को उचित सुरक्षा में नहीं रखने का भी आरोप है। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, मात्र 15 दिनों के अंतराल में दो आरोपितों के पुलिस हिरासत से भाग जाने की घटना सामने आई थी। इसे एसएसपी ने कर्तव्य में घोर लापरवाही मानते हुए निलंबन का आदेश दिया।
औराई थानाध्यक्ष पर मनमाने निर्णय लेने का आरोप
दूसरी ओर, औराई के थानाध्यक्ष, पुअनि सुनील कुमार पर भी कर्तव्य में लापरवाही और मनमाने तरीके से निर्णय लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने लूट की एक घटना को कमतर करके दिखाया और उसे गृह अतिचार/गृहभेदन की हल्की धाराओं में दर्ज किया।
इसके अलावा, सुनील कुमार पर वरीय अधिकारी को गुमराह करने का प्रयास करने की बात भी सामने आई है। ई-साक्ष्य एप पर दर्ज घटना विवरण, तलाशी-जप्ती और गवाहों के बयान आदि की समुचित समीक्षा नहीं करने का आरोप भी उनके खिलाफ है। ये सभी आरोप पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं।
एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि कर्तव्य में लापरवाही और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने दोनों थानाध्यक्षों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में विस्तृत विभागीय जांच की जाएगी, जिसके बाद आगे की कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। दोनों अधिकारियों को फिलहाल सामान्य जीवनयापन भत्ता पर निलंबित किया गया है।
इस कार्रवाई से मुजफ्फरपुर पुलिस में जवाबदेही और सतर्कता बढ़ाने का संदेश गया है। उम्मीद है कि यह कदम पुलिसकर्मियों को अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक गंभीर बनाएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में सहायक होगा।







