Bihar Education: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव आने वाला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कॉलेजों में छात्रों की 75% उपस्थिति अनिवार्य करने का सख्त निर्देश दिया है, जिससे अब केवल नामांकन कराकर परीक्षा देने वाले छात्रों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए, क्योंकि यह शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए सीएम का सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उच्च शिक्षा प्रणाली की समीक्षा करते हुए कॉलेज प्रबंधन को छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कॉलेजों में 75 प्रतिशत उपस्थिति हर हाल में होनी चाहिए। यह महत्वपूर्ण निर्देश ऐसे समय में आया है, जब राज्य में बड़ी संख्या में असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियां की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि केवल शिक्षकों की नियुक्ति से उच्च शिक्षा मजबूत नहीं होगी, बल्कि इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब छात्र भी नियमित रूप से कॉलेज आएं, कक्षाओं में बैठें और शिक्षकों से पढ़ाई करें। उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान उच्च शिक्षा की मौजूदा स्थिति पर अपनी चिंता व्यक्त की और कॉलेज प्रबंधन से छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उनका मानना है कि शिक्षकों की संख्या बढ़ने के साथ ही कक्षाओं में छात्रों की मौजूदगी भी अनिवार्य रूप से बढ़नी चाहिए।


प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों पर असर
मुख्यमंत्री के इस संदेश का एक बड़ा हिस्सा उन छात्रों से संबंधित है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के कारण कॉलेज से दूरी बना लेते हैं। अक्सर देखा जाता है कि जनरल कॉम्पिटिशन, सरकारी नौकरी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई छात्र नियमित कक्षाओं में शामिल नहीं होते हैं। मुख्यमंत्री ने इस स्थिति को सामान्य नहीं मानने का संकेत दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि छात्र कॉलेज ही नहीं आएंगे, तो शिक्षकों और कॉलेज की पूरी व्यवस्था का उद्देश्य क्या रह जाएगा। सरकार शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए लगातार नियुक्तियां कर रही है, ऐसे में छात्रों की नियमित उपस्थिति भी शिक्षा सुधार का एक अभिन्न हिस्सा है।
छात्रों से संवाद और बेहतर माहौल बनाने पर जोर
सम्राट चौधरी ने कॉलेज प्रबंधन से केवल उपस्थिति का नियम लागू करने पर ही ध्यान केंद्रित न करने को कहा। उन्होंने छात्रों की समस्याओं को समझने की आवश्यकता पर भी बल दिया। मुख्यमंत्री का कहना था कि यदि किसी छात्र को कॉलेज आने में कोई परेशानी है, तो उसके पीछे के कारण को जानना और उसे दूर करना आवश्यक है। उन्होंने सलाह दी कि कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों को छात्रों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। केवल आदेश जारी करने से उपस्थिति नहीं बढ़ेगी, बल्कि कॉलेज का वातावरण ऐसा होना चाहिए, जिससे छात्र नियमित रूप से कक्षा में आने के लिए प्रेरित हों। बिहार में उच्च शिक्षा को लेकर सरकार शिक्षकों की नियुक्ति पर जोर दे रही है और असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब सरकार का ध्यान शिक्षकों की उपलब्धता के साथ-साथ पढ़ाई की नियमितता पर भी केंद्रित है। 75 प्रतिशत अटेंडेंस का यह संदेश उन छात्रों की दिनचर्या को काफी प्रभावित कर सकता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ स्नातक या अन्य उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके लिए कॉलेज की पढ़ाई को पूरी तरह छोड़ना उचित नहीं है। उच्च शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक और छात्र दोनों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।







