BRICS Summit: हालिया ब्रिक्स सम्मेलन में भारत को बड़ी कूटनीतिक कामयाबी मिली है। समूह के सभी सदस्य देशों की सहमति के बाद शनिवार को एक साझा घोषणापत्र जारी किया गया। इस ऐतिहासिक घोषणापत्र में गाजा युद्ध का विशेष जिक्र है, जहां इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे के बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया गया है। भारत की सक्रिय भूमिका से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर उभरे मतभेद भी दूर हो पाए, जिसके बाद ही घोषणापत्र अपनाने पर सहमति बनी।
सम्मेलन के पहले दिन की बैठक समाप्त होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणापत्र को अपनाए जाने का एलान किया। इस दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत ब्रिक्स के अन्य शीर्ष नेता मौजूद थे। घोषणापत्र के मसौदे पर अंतिम समय तक गहन बातचीत चलती रही, जिसमें भारत ने एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

भारत की पहल से बनी गाजा पर सहमति, आतंकवाद की निंदा
शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच कुछ मुद्दों पर कड़ा रुख था, लेकिन भारत दोनों ही देशों को सहमत करने में सफल रहा। पहले ही दिन घोषणापत्र को अपना लिया जाना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है। ब्रिक्स देशों ने पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है, जो आतंकवाद के खिलाफ समूह की एकजुटता को दर्शाता है।
घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने सभी पक्षों से गाजा में युद्धविराम जारी रखने और बिना किसी रुकावट के मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की। गाजा में फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित करने वाली नीतियों का कड़ा विरोध किया गया। पिछले साल हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद जारी हिंसा पर समूह ने गहरी चिंता व्यक्त की।
ब्रिक्स ने इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के साथ-साथ फिलिस्तीनी लोगों के जायज अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दोहराया। इसमें आत्मनिर्णय और वापसी का अधिकार भी शामिल है। समूह ने फिलिस्तीन की पूर्ण संयुक्त राष्ट्र सदस्यता और ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के प्रति भी अपना समर्थन जताया। इस समाधान के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त 1967 की सीमाओं (जिनमें गाजा और वेस्ट बैंक शामिल हैं) के भीतर एक स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की बात कही गई है, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम होगी।
ब्रिक्स देशों ने संवाद और कूटनीति पर दिया जोर
ब्रिक्स नेताओं ने संघर्ष को ‘संवाद और कूटनीति’ से समाप्त करने के भारत के रुख का समर्थन किया। उन्होंने लागू अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा के सुचारू प्रवाह को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर बल दिया। समूह ने पश्चिम एशिया में तनाव के लगातार बढ़ने पर गहरी चिंता व्यक्त की और अधिकतम संयम बरतने तथा ऐसे कार्यों से बचने का आह्वान किया, जो हालात को और खराब कर सकते हैं।
घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पूरी तरह पालन करने के साथ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना एवं आम नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। ब्रिक्स ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से ऐसे दीर्घकालिक समझौते की दिशा में प्रयास बढ़ाने को प्रोत्साहित किया, जो क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देगा। समूह ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं होने वाली व्यापार प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों के बढ़ते चलन की भी आलोचना की और एकतरफा शुल्क व गैर-शुल्क उपायों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।







