Bihar Education: बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं और डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार से वित्तीय सहयोग की मांग की है। बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी से हुई मुलाकात के दौरान उन्होंने इस संबंध में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे। बिहार सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर स्कूल में बेहतर भवन, आधुनिक तकनीक और आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

शिक्षा मंत्री ने विशेष रूप से 1520 ऐसे विद्यालयों के लिए नए भवन निर्माण की सहायता का अनुरोध किया, जिनके पास वर्तमान में अपनी जमीन या बिल्डिंग नहीं है। इसके अतिरिक्त, राज्य में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 3818 नए आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) लैब के संचालन के लिए 91.63 करोड़ रुपये और पहले से चल रही 784 आईसीटी लैब के लिए 18.82 करोड़ रुपये की राशि जल्द जारी करने की मांग भी की गई है। इस बैठक में बिहार के सरकारी स्कूलों से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई।
हजारों स्कूलों के लिए नए भवन और डिजिटल लैब की मांग
बैठक में बिहार के 1520 भूमिहीन और भवनविहीन स्कूलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया, जहां नए भवन निर्माण के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता मांगी गई है। शिक्षा मंत्री ने संबंधित प्रस्तावों को शीघ्र आगे बढ़ाने का आग्रह किया। डिजिटल शिक्षा के मोर्चे पर, 3818 आईसीटी लैब के सुचारु संचालन के लिए 91.63 करोड़ रुपये और 784 पहले से संचालित आईसीटी लैब के लिए 18.82 करोड़ रुपये की स्वीकृति का अनुरोध किया गया।
पीएमश्री विद्यालयों से जुड़ी सुविधाओं को लेकर भी विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इसके तहत 227 अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण, 525 विद्यालयों में खराब शौचालयों की मरम्मत, और 836 विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड तथा इंटरैक्टिव लर्निंग पैनल लगाने के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की गई। इसके अलावा, स्कूलों में बैंड यूनिफॉर्म के लिए भी आवश्यक अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया। राज्य के 1275 विद्यालयों में विज्ञान प्रयोगशालाओं के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक स्थलों को जल्द मंजूरी देने की मांग भी की गई, ताकि विज्ञान शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके।
शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति के लिए नई तकनीक
स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति को तकनीक से जोड़ने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) लागू करने का प्रस्ताव भी केंद्र के सामने रखा गया। इस नई व्यवस्था के लिए 8.29 करोड़ रुपये की राशि जारी करने की मांग की गई है, जिसका उद्देश्य उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाना है। यह कदम पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में सहायक होगा।
शिक्षक प्रशिक्षण और उल्लास कार्यक्रम के विस्तार का प्रस्ताव
शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े संस्थानों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। भोजपुर, गया, मुजफ्फरपुर, खगड़िया, समस्तीपुर और औरंगाबाद के छह डायट (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान) को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसके लिए 50.80 करोड़ रुपये की स्पिल ओवर राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। बैठक में ‘उल्लास’ कार्यक्रम की अवधि बढ़ाने का मुद्दा भी उठाया गया, जिसमें शिक्षा मंत्री ने इस कार्यक्रम को वर्ष 2027 से 2032 तक जारी रखने की मांग की, ताकि राज्य में शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों को निरंतरता मिल सके।








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