Patliputra University PhD Exam: बिहार में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (PPU) द्वारा आयोजित पीएचडी कोर्स वर्क परीक्षा 2026 का दूसरा दिन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। टीपीएस कॉलेज में यह परीक्षा शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में आयोजित की गई, जहां शोधार्थियों ने ‘रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स’ (पेपर कोड: 980102) का पेपर दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूरे परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए कड़ी निगरानी रखी।
कड़ी निगरानी में हुई पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा
परीक्षा के सफल संचालन के लिए पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंह के विशेष निर्देश पर एक उच्चस्तरीय टीम ने टीपीएस कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस टीम में पीपीयू के परीक्षा नियंत्रक प्रो. प्रणय गुप्ता, सहायक परीक्षा नियंत्रक डॉ. मुकुल कुमार, और परीक्षा पर्यवेक्षक डॉ. सुजीत दुबे व डॉ. संतवना रानी जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

निरीक्षण के दौरान, अधिकारियों ने परीक्षा हॉल में जाकर प्रश्नपत्रों के वितरण और छात्रों के बैठने की व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। विश्वविद्यालय की टीम ने कॉलेज द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्था और परीक्षा के शांतिपूर्ण माहौल पर अपनी संतुष्टि व्यक्त की। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि शोध और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए ऐसी पारदर्शी व्यवस्थाएं अत्यंत आवश्यक हैं।
पारदर्शिता और अनुशासन पर PPU का जोर
‘रिसर्च एंड पब्लिकेशन एथिक्स’ पीएचडी कोर्स वर्क का एक महत्वपूर्ण पेपर है। यह पेपर शोधार्थियों की अकादमिक ईमानदारी, प्रकाशन से संबंधित नैतिक नियमों और एक शोधकर्ता के तौर पर उनकी जिम्मेदारियों का आकलन करता है। परीक्षा केंद्र पर इस पेपर को लेकर परीक्षार्थियों में काफी गंभीरता और अनुशासन देखने को मिला, जो विश्वविद्यालय के मानकों के अनुरूप था।
टीपीएस कॉलेज के प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य के कुशल नेतृत्व में कॉलेज के परीक्षा विभाग ने इस आयोजन को बेहतर समन्वय के साथ संपन्न किया। विश्वविद्यालय की निरीक्षण टीम ने कॉलेज के परीक्षा नियंत्रक मुकुंद कुमार और अंबरीश कुमार द्वारा किए गए कार्यों की भी सराहना की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कॉलेज प्रशासन और परीक्षा विभाग के बीच बेहतर तालमेल के कारण ही परीक्षा बिना किसी बाधा के पूरी हो सकी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शोध और उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ऐसी पारदर्शी परीक्षाओं का आयोजन बेहद महत्वपूर्ण है। भविष्य में भी इसी तरह की निगरानी और व्यवस्था के साथ परीक्षाओं का संचालन किया जाएगा ताकि शोधार्थियों को एक निष्पक्ष और उच्च स्तरीय शैक्षिक मंच मिल सके।







