Bihar Thermal Power Plant: बिहार के भागलपुर जिले में स्थापित हो रहे अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट की उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि की गई है। पीरपैंती में निर्माणाधीन इस परियोजना की वर्तमान क्षमता 2,400 मेगावाट थी, जिसे अब 2,400 मेगावाट और बढ़ाकर कुल 4,800 मेगावाट कर दिया गया है। अडानी पावर लिमिटेड द्वारा विकसित किया जा रहा यह विशाल Bihar Thermal Power Plant अब देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वर्तमान में प्लांट की तीन यूनिट का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। क्षमता विस्तार के बाद तीन अतिरिक्त नई यूनिटें लगाई जाएंगी। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पीरपैंती अंचल के सिरमतपुर, हरिनकोल, मुंडवा (तुंडवा), सुंदरपुर और आसपास के चिह्नित गांवों में आकार ले रही है।
10 हजार से अधिक युवाओं को मिलेगा रोजगार और ऊर्जा सुरक्षा
प्लांट की क्षमता दोगुनी होने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अनुमान है कि निर्माण कार्य के दौरान करीब 10 से 12 हजार लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। एक बार पूरी तरह तैयार हो जाने के बाद, यह प्लांट भारत की लगातार बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करेगा और ‘विकसित भारत – 2047’ के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के तहत देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम योगदान देगा।
विस्तार के लिए आवेदन प्रक्रिया और गंगा से पानी की मांग
अडानी पावर लिमिटेड के पदाधिकारी आरएन शुक्ला ने क्षमता विस्तार के लिए आवश्यक कागजी और कानूनी प्रक्रियाओं को तेज कर दिया है। उन्होंने भारत सरकार के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के निदेशक को टीओआर (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) आवेदन प्रस्तुत किया है। परियोजना से जुड़े अन्य सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज 24 अगस्त 2026 को जमा करा दिए गए हैं। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि इस प्लांट का निर्माण दूसरे चरण में किया जाएगा।
परियोजना के लिए पानी की आवश्यकता भी बढ़ेगी। इसे देखते हुए अडानी पावर लिमिटेड के अधिकारी एसके भारद्वाज ने गंगा नदी से प्रतिवर्ष अतिरिक्त 42 माइक्रोमीटर जल आवंटित करने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने 10 अगस्त 2026 को बाढ़ नियंत्रण प्रभाग, पटना के मुख्य अभियंता को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। पत्र में बताया गया है कि बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग और केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने निर्माणाधीन 2,400 मेगावाट परियोजना के लिए पहले ही 42 माइक्रोमीटर जल प्रति वर्ष आवंटित किया हुआ है। अब अतिरिक्त 2400 मेगावाट के विस्तार के लिए इतनी ही अतिरिक्त जल राशि की मांग की गई है।
इस विस्तार से न केवल बिहार बल्कि पूरे देश की बिजली आपूर्ति में सुधार होगा, बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।







