मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 42 वर्षीय नीरज यादव ने मंगलवार रात दिल्ली स्थित अपने एक फ्लैट पर आत्महत्या की। शुरुआती जांच में किसी विषाक्त पदार्थ का सेवन करने का संदेह जताया जा रहा है। उनके
पार्थिव शरीर का पोस्टमार्टम दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में किया जा रहा है। कई अन्य पैरा एथलीट इस दुखद खबर के बाद अस्पताल पहुंचे हैं।
भारत के चीफ पैरा-एथलेटिक्स कोच एस सत्यनारायण ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा, ‘हां, नीरज ने सुसाइड किया है। मुझे भी यही पता चला है। मुझे बताया गया है कि उसने कल रात अपने फ्लैट में ज़हर खा लिया था। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है।’ कोच को लगता है कि नीरज अवसाद में रहे होंगे। उन्होंने आगे बताया कि डोपिंग सस्पेंशन के कारण आइची-नागोया एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाने के कारण वह मानसिक पीड़ा से गुजर रहे थे।
डोपिंग सस्पेंशन ने तोड़ा था नीरज का हौसला
उत्तर प्रदेश के रहने वाले नीरज यादव का करियर सात साल की उम्र में पोस्ट-पोलियो रेसिडुअल पैरालिसिस का पता चलने के बाद भी बुलंदियों पर रहा। उन्होंने 2005 से 2012 तक लगभग 6 साल तक व्हीलचेयर टेनिस खेला। इसके बाद वह पैरा एथलेटिक्स में आए और 2015 में दिल्ली स्टेट एथलेटिक्स मीट में शॉट पुट, जैवलिन और डिस्कस इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर बड़ी सफलता हासिल की।
नीरज ने 2018 में जकार्ता में हुए एशियन पैरा गेम्स में मेंस F55 जेवलिन थ्रो में 29.84 मीटर के एशियन रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता था। इसके बाद 2023 में चीन में आयोजित अगले एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने दो इवेंट में गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे, जिसमें जेवलिन के अलावा डिस्कस इवेंट भी शामिल था।
हालांकि, अक्टूबर 2023 के बाद उनका करियर नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) द्वारा लगाए गए सस्पेंशन के कारण लगभग समाप्त हो गया था। बेंगलुरु में लिए गए उनके सैंपल में स्टैनोजोलोल नामक एनाबॉलिक स्टेरॉयड पाया गया था, जिसके बाद उन्हें प्रतिबंधित कर दिया गया था। कोच के अनुसार, इसी डोपिंग सस्पेंशन के कारण हुई मानसिक पीड़ा ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
जब नीरज यादव ने 2018 के एशियन पैरा गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था, तब उन्होंने भारत आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। पीएम मोदी ने खुद अपनी सोशल मीडिया अकाउंट्स पर उनकी तस्वीर साझा की थी। 2023 में भी, दो गोल्ड मेडल जीतने पर पीएम मोदी ने उन्हें बधाई दी थी। नीरज यादव का निधन भारतीय खेल के लिए एक बड़ी क्षति है, और यह एथलीटों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।