Bihar Espionage: बिहार के रक्सौल में पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंटों से जुड़े होने के आरोप में दो युवकों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत देती है। इन युवकों पर आरोप है कि वे पैसों के बदले अपने मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप के ओटीपी पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) को देते थे।
इन भारतीय नंबरों का कथित तौर पर भारत के खिलाफ जासूसी के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि इन युवकों को प्रत्येक ओटीपी के लिए 500 से 1,000 रुपये मिलते थे। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में दर्ज एक केस की जांच के दौरान हुआ, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत अलर्ट मोड पर आ गईं।

विजयवाड़ा से खुला नेटवर्क, मोतिहारी पुलिस की कार्रवाई
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में दर्ज कांड संख्या 01/26 की गहन जांच के दौरान इस पूरे नेटवर्क का पता चला। विजयवाड़ा पुलिस ने तत्काल इसकी सूचना बिहार की मोतिहारी पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही मोतिहारी और रक्सौल पुलिस ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए भारत-नेपाल सीमा के पास रक्सौल में छापेमारी की। इस दौरान दोनों संदिग्ध युवकों को हिरासत में लिया गया और पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से दो मोबाइल फोन भी मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया है। इन फोनों की जांच से कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है। पुलिस को पाकिस्तानी नंबरों से हुई बातचीत और ओटीपी साझा करने से जुड़े ठोस सबूत हाथ लगे हैं। आरोप है कि पैसों के लालच में ये युवक अपने और अपने दोस्तों के मोबाइल नंबरों के ओटीपी लगातार साझा कर रहे थे।
मोतिहारी के एसपी ने इस मामले पर कहा, ‘यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। दोनों युवकों से पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। उनके अन्य साथियों की भी तलाश की जा रही है। भारत-नेपाल सीमा पर ऐसे नेटवर्क पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इस संवेदनशील मामले में केंद्रीय एजेंसियों को भी सूचना दी गई है।’
रक्सौल सीमा पर पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
पुलिस सूत्रों के अनुसार, रक्सौल सीमा के पास इस तरह के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। पूर्व में भी पाकिस्तानी एजेंटों पर भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल कर जासूसी करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि नेपाली और भारतीय सिम कार्ड के जरिए भारतीय सेना और सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां जुटाने की कोशिशें की जाती रही हैं।
इस वर्तमान मामले में मोबाइल नंबर और व्हाट्सएप ओटीपी के जरिए फर्जी खाते बनाने और उनका इस्तेमाल करने का तरीका सामने आया है। पुलिस अब इस खतरनाक नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। भारत-नेपाल सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से सतर्क हैं।

















