Bihar Anant Singh: बिहार के मोकामा से पूर्व विधायक अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह की हार के बाद अनंत सिंह का नाम चर्चा में आया। हाल ही में जदयू से निष्कासन को लेकर पत्रकारों के सवाल पर उनका बेबाक जवाब खूब वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा, ‘हमको दिक्कत नहीं है, तो तोरा काहे दिक्कत हो रहा है?’ मंगलवार की रात एक पत्रकार का माइक झटकने के बाद उनका यह खास अंदाज़ फिर देखने को मिला। ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह का यह व्यवहार कोई नया नहीं है।
फिर चर्चा में आए ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह: पत्रकार का माइक झटका
अनंत सिंह अपने ठेठ देसी अंदाज़ और बेबाक जवाबों के लिए जाने जाते हैं। दो दिन पहले जदयू से निष्कासन पर उन्होंने पत्रकारों को सीधे जवाब दिया था। इस रात भी उनका यही बेबाक अंदाज़ दिखा, जब एक पत्रकार का सवाल पसंद नहीं आने पर उन्होंने माइक झटक दिया। यह पहली बार नहीं है कि अनंत सिंह अपने व्यवहार के कारण चर्चा में आए हों। वर्ष 2007 में रेशमा खातून की हत्या और दुष्कर्म से जुड़े मामले पर सवाल पूछने पर उन्होंने एक पत्रकार को थप्पड़ जड़ दिया था।

कैमरे के सामने इंटरव्यू देते समय सिगरेट पीना हो या हथियारबंद लोगों के बीच नजर आना, अनंत सिंह का अंदाज़ हमेशा सुर्खियों में रहा है।
वर्ष 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे के मुताबिक, उन पर 28 आपराधिक मामले दर्ज थे। इसी हलफनामे में उन्होंने करीब 106 करोड़ रुपये की संपत्ति का ब्योरा दिया था।
28 मुकदमे, 106 करोड़ की संपत्ति: चुनावी हलफनामे का ब्योरा
अनंत सिंह के 2025 के चुनावी हलफनामे में उनकी संपत्ति और आपराधिक मुकदमों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह ब्योरा उनकी आर्थिक स्थिति और कानूनी चुनौतियों को दर्शाता है।
| विवरण | हलफनामे में दर्ज आधिकारिक आंकड़े |
|---|---|
| नाम | अनंत कुमार सिंह |
| पिता का नाम | चंद्रदीप सिंह |
| पार्टी | जनता दल (यूनाइटेड) |
| निर्वाचन क्षेत्र | मोकामा (178) |
| कुल संपत्ति | ₹100,61,73,708 (लगभग ₹100.61 करोड़) |
| चल संपत्ति (Movable Assets) | ₹39,73,90,718 |
| नकद राशि | स्वयं के पास लगभग ₹15.61 लाख तथा पत्नी के पास ₹34.60 लाख |
| वाहन | फॉर्च्यूनर/मर्सिडीज जैसी लग्जरी एसयूवी गाड़ियां |
| बैंक जमा व निवेश | पंजाब नेशनल बैंक (शाखा बाढ़ एवं पटना) व अन्य वित्तीय संस्थानों में जमा राशि तथा बॉन्ड/शेयर में निवेश |
| अचल संपत्ति (Immovable Assets) | ₹60,87,82,990 (लगभग ₹60.87 करोड़) |
| कृषि योग्य भूमि | बाढ़, मोकामा और नदावन क्षेत्र में विस्तृत कृषि योग्य पैतृक भूमि |
| व्यावसायिक संपत्ति | पटना (ईस्ट गांधी मैदान, बोरिंग रोड क्षेत्र) और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यावसायिक परिसर तथा प्लॉट |
| आवासीय भवन | नदवां (पैतृक आवास) और पटना स्थित आवासीय संपत्ति |
| कुल देनदारियां (Liabilities) | ₹25,99,55,110 (लगभग ₹25.99 करोड़) |
| वार्षिक आय (ITR 2024-25) | स्वयं: ₹39,66,064 |
| व्यवसाय/आजीविका का स्रोत | कृषि, व्यापार (Business) एवं समाज सेवा |
| आपराधिक मुकदमों की संख्या | कुल 28 लंबित मामले |
यह आंकड़ा अनंत सिंह की बड़ी संपत्ति और उनके खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों की गंभीरता को दर्शाता है, जो उन्हें बिहार की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान देता है।
कैसे पड़ा नाम ‘छोटे सरकार’? मछली के तालाबों से जुड़ी कहानी
अनंत सिंह को मोकामा और आसपास के इलाकों में ‘छोटे सरकार’ के नाम से जाना जाता है। इस उपनाम के पीछे मछली के तालाबों की नीलामी से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अनंत सिंह मछली पालन के लिए तालाबों की नीलामी में हिस्सा लेते थे। सरकार से तालाब का ठेका लेने के बाद वे उसे आगे बोली लगवाकर मुनाफे पर देने का काम करते थे।
कहा जाता है कि वे नीलामी के लिए रविवार का दिन चुनते थे, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें। जब लोगों से पूछा जाता कि रविवार को कौन-सी नीलामी होती है, तो नीलामी में जाने वाले जवाब देते थे कि यह ‘छोटे सरकार’ की नीलामी है। धीरे-धीरे यह नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि अनंत सिंह की पहचान उनके असली नाम से ज्यादा ‘छोटे सरकार’ के रूप में होने लगी।
भाई की हत्या और अपराध की दुनिया में प्रवेश: अनंत सिंह की कहानी
अनंत सिंह के आपराधिक अतीत को लेकर कई किस्से प्रचलित हैं। एक समय उनके खिलाफ 160 से अधिक मुकदमे दर्ज होने की बात कही जाती थी। वर्ष 2014 में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने खुद पर करीब 150 मुकदमे दर्ज होने की बात कही थी। उन्होंने यह भी बताया था कि इनमें से ज्यादातर मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी थी। वहीं, वर्ष 2025 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपने खिलाफ 28 आपराधिक मामलों का उल्लेख किया है।
अपने भाई की हत्या को अनंत सिंह अक्सर अपने जीवन का निर्णायक मोड़ बताते रहे हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि भाई की हत्या के बाद वह साधु जीवन छोड़कर घर लौट आए थे और भाई के हत्यारे से बदला लिया था। स्थानीय स्तर पर प्रचलित एक कहानी के मुताबिक, वह भाई के हत्यारे तक पहुंचने के लिए गंगा नदी पार कर गए थे। इस घटना को उनके अपराध की दुनिया में प्रवेश से जोड़कर देखा जाता है।
भाई की हत्या का बदला लेने से जुड़े सवालों पर अनंत सिंह कई बार कह चुके हैं कि उन्हें इसका अफसोस नहीं है। उनका कहना रहा है कि उनके लिए इंसाफ करना जरूरी था।
बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान भी अनंत सिंह का एक बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बना था। उन्होंने जदयू के एक बड़े नेता के लिए नौ हत्याएं करने की बात कही थी। बयान पर विवाद होने के बाद उन्होंने सफाई भी दी थी।
बचपन में साधु संग रहे, नहीं गए स्कूल: निडरता का दावा
अनंत सिंह के शुरुआती जीवन को लेकर भी कई किस्से सुनाए जाते हैं। कहा जाता है कि उनके जन्म के बाद उनके पिता साधु बन गए थे। बचपन में अनंत सिंह भी गांव आए एक साधु के साथ घर छोड़कर निकल गए थे। वह कुछ समय हरिद्वार में साधुओं के साथ रहे और बाद में अयोध्या भी गए। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने औपचारिक रूप से स्कूल में पढ़ाई कभी नहीं की। वे इसे स्वीकार भी करते हैं।
अनंत सिंह के बचपन से जुड़ा एक और किस्सा सांप पकड़ने का है। कहा जाता है कि वह बचपन में सांप भी पकड़ लिया करते थे। अनंत सिंह खुद अपनी इस आदत को निडरता से जोड़ते रहे हैं। उनका दावा है कि उन्हें मौत से डर नहीं लगता और उन पर 20 से अधिक बार गोलियां चलाई जा चुकी हैं।
ठेठ देसी भाषा, बेबाक जवाब, समर्थकों की मौजूदगी और अपने अतीत से जुड़े किस्सों के कारण अनंत सिंह लगातार चर्चा में बने रहते हैं। मोकामा की राजनीति से लेकर राज्यस्तरीय सियासी घटनाक्रम तक, उनका अंदाज़ अक्सर सुर्खियों का हिस्सा बन जाता है।

















