Bihar Teacher Leave Rules बिहार के शिक्षकों को बड़ा झटका! अब 3 साल तक नहीं मिलेगी EL, छुट्टी के नए नियम लागू
Bihar Teacher Leave Rules: शिक्षा विभाग ने अवकाश प्रक्रिया में की बड़ी फेरबदल, नए शिक्षकों को उपार्जित अवकाश के लिए करना होगा लंबा इंतजार, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर.
Bihar Teacher Leave Rules बिहार के शिक्षकों को बड़ा झटका! अब 3 साल तक नहीं मिलेगी EL, छुट्टी के नए नियम लागू
Bihar Teacher Leave Rules: अब बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए छुट्टी लेने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है. शिक्षा विभाग ने अवकाश नियमों में संशोधन किया है, जिसके तहत शिक्षकों को अब ई-शिक्षाकोष पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से ही अवकाश के लिए आवेदन करना होगा. मौखिक अनुरोध या कागजी आवेदन अब मान्य नहीं होंगे, जिससे अवकाश प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है. इस नई व्यवस्था में छुट्टी की मंजूरी के लिए सख्त समय-सीमा भी तय की गई है, जिसका सीधा असर शिक्षकों की उपस्थिति और स्कूल प्रबंधन पर दिखेगा.
📚 बिहार के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए अवकाश नियमों में बदलाव
बिहार के सरकारी स्कूलों में महिला शिक्षिकाओं और कर्मियों को अधिकतम दो बच्चों की देखभाल के लिए 730 दिनों का शिशु देखभाल अवकाश मिलेगा।
महिला शिक्षिकाओं को 180 दिनों का मातृत्व अवकाश और पुरुष शिक्षकों को 15 दिनों का पितृत्व अवकाश भी दिया जाएगा।
अवकाश के लिए ई-शिक्षाकोष पोर्टल या मोबाइल ऐप से ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य होगा। आकस्मिक अवकाश पर उसी दिन और अन्य आवेदनों पर अधिकतम सात कार्यदिवस में निर्णय लेना होगा।
शिक्षा विभाग द्वारा लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को छुट्टी के लिए ई-शिक्षाकोष पोर्टल या इसके मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा. पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे अवकाश के आवेदन और उनकी मंजूरी का पूरा रिकॉर्ड पोर्टल पर दर्ज रहेगा. अब केवल मौखिक सूचना या कागजी आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. बिना मंजूरी के छुट्टी पर जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान भी है, जिससे फर्जी हाजिरी पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.
नए शिक्षकों को 3 साल तक नहीं मिलेगा उपार्जित अवकाश
नए नियमों में उपार्जित अवकाश (अर्न्ड लीव – EL) को लेकर महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. इसके तहत, नए नियुक्त शिक्षकों को शुरुआती तीन साल तक उपार्जित अवकाश का लाभ नहीं मिल पाएगा. वहीं, 11 महीने तक काम करने वाले शिक्षकों को एक महीने का बिना वेतन अवकाश लेने का विकल्प मिलेगा. इसके अतिरिक्त, कोई भी शिक्षक एक बार में अधिकतम दो महीने तक का अवकाश ले सकेगा. हालांकि, विभिन्न प्रकार की छुट्टियों पर लागू अन्य शर्तों के लिए शिक्षकों को विभागीय निर्देशों का पालन करना होगा.
आकस्मिक अवकाश और विशेष अवकाश के आवेदनों पर प्रधानाध्यापक या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) को उसी दिन निर्णय लेना होगा. इस व्यवस्था से शिक्षकों को छुट्टी की मंजूरी के लिए अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. दूसरी ओर, मातृत्व अवकाश, शिशु देखभाल अवकाश और चिकित्सा अवकाश जैसे आवेदनों की प्रक्रिया थोड़ी अलग होगी. ऐसे आवेदन संबंधित अधिकारी को तीन कार्य दिवसों के भीतर जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को भेजने होंगे, ताकि उन पर समय रहते कार्रवाई हो सके.
समय-सीमा और अधिकारियों की जवाबदेही
नई व्यवस्था में अवकाश आवेदनों को आगे बढ़ाने के लिए सख्त समय-सीमा निर्धारित की गई है. यदि संबंधित अधिकारी तय समय के भीतर आवेदन को आगे नहीं बढ़ाते हैं, तो वह आवेदन स्वतः ही जिला शिक्षा पदाधिकारी के पास पहुंच जाएगा. DEO को अधिकतम सात कार्य दिवसों के भीतर इन आवेदनों पर निर्णय लेना होगा. इस नियम का उद्देश्य आवेदनों को लंबित रखने की समस्या को खत्म करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके.
बिना मंजूरी छुट्टी लेने पर होंगे गंभीर परिणाम
बिहार सेवा संहिता के नियम-152 के अनुसार, छुट्टी को शिक्षक का अधिकार नहीं माना गया है. इसका मतलब है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत अवकाश की स्वीकृति लेना बेहद जरूरी है. यदि कोई शिक्षक बिना स्वीकृति के अनुपस्थित रहता है, तो उसका वेतन रोका जा सकता है. ऐसे मामलों में सेवा में टूट माने जाने की कार्रवाई भी हो सकती है, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. इसलिए, शिक्षकों को छुट्टी पर जाने से पहले आवेदन की मंजूरी सुनिश्चित करनी होगी.
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, “छुट्टी की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है. अब सभी आवेदन पोर्टल के माध्यम से होंगे. इससे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी.” मंत्री ने आगे कहा कि तय समय-सीमा का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस नई व्यवस्था के जरिए छुट्टी के आवेदनों का समय पर निपटारा करने और स्कूलों में उपस्थिति व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है.
यह नई प्रणाली शिक्षकों की उपस्थिति में सुधार लाने और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि स्कूलों में शिक्षण कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहे और शिक्षकों की अवकाश संबंधी समस्याओं का भी समय पर समाधान हो सके.