Bihar Ganga Erosion: बिहार में गंगा नदी का कटाव एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिसका भयावह असर भागलपुर के सबौर प्रखंड स्थित पुरानी रामनगर गांव में साफ दिख रहा है। यहां मासूम बच्चे हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। गंगा की तेज लहरों ने न केवल गांव की जमीन और घरों को निगला है, बल्कि बच्चों के सरकारी स्कूल को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह बंद हो गया है। जिन नन्हे हाथों में किताबें होनी चाहिए और जिनकी आंखों में सुनहरे भविष्य के सपने सजने चाहिए, उनकी जिंदगी हर कदम पर खतरे से जूझ रही है।
मामलखा पंचायत के पुरानी रामनगर गांव का यह दर्दनाक मंजर हर किसी को झकझोर रहा है। गंगा का कटाव इतना भीषण है कि कई पक्के मकान और उपजाऊ खेत उसकी आगोश में समा चुके हैं। अब तो गांव का सरकारी विद्यालय भी कटाव के मुहाने पर पहुंच गया है, जिसके चलते बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उसे बंद करने का फैसला लिया गया।
जानलेवा नेशनल हाईवे और खतरनाक रास्ता
स्कूल बंद होने का सबसे बड़ा खामियाजा वहां के बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्हें दूसरे गांव के स्कूल तक पैदल जाना पड़ता है। इस रास्ते में नेशनल हाईवे पड़ता है, जहां तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच हर पल यह डर सताता है कि कहीं कोई वाहन उन्हें टक्कर न मार दे। छोटे-छोटे बच्चे सहमे कदमों से सड़क पार करते हैं और अपनी मंजिल की ओर बढ़ते हैं।
यह मुसीबत यहीं खत्म नहीं होती। घर लौटते समय कटाव से जर्जर हो चुका बांध और कच्चा रास्ता उनके लिए एक और खतरा बन जाता है। फिसलन भरे और टूटे रास्ते पर चलते हुए बच्चों को हमेशा यह डर रहता है कि कहीं उनका पैर फिसल न जाए और वे गंगा नदी में न गिर पड़ें। शिक्षा की नींव मजबूत करने निकले इन नौनिहालों के लिए हर दिन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं सुधरे हालात
गंगा का कटाव रोकने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये से अधिक खर्च कर कटावरोधी कार्य भी कराए थे, लेकिन इन कार्यों का कोई खास असर नहीं दिखा। हालात जस के तस बने हुए हैं। ग्रामीण वर्षों से मजबूत रिंग बांध और ठोस कटावरोधी उपायों की मांग कर रहे हैं, ताकि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके और वे बिना किसी डर के शिक्षा ग्रहण कर सकें।
प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या इन मासूमों की सुरक्षा के लिए समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे? यह सवाल ग्रामीणों के साथ-साथ हर जिम्मेदार नागरिक के मन में उठ रहा है।
इन बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। प्रशासन को इस मामले पर तत्काल ध्यान देने और स्थायी समाधान निकालने की आवश्यकता है, ताकि इन बच्चों को मौत के डर के साये में स्कूल जाने को मजबूर न होना पड़े।

















