Bihar Nagar Panchayat: हिमांशु शेखर भागलपुर: बिहार में अकबरनगर नगर पंचायत के प्रशासनिक भवन निर्माण का मामला डेढ़ साल से अधिक समय से अटका हुआ है। बिहार सरकार ने इसके लिए 2 करोड़ 49 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी और पहली किस्त के तौर पर 25 लाख रुपये जारी भी कर दिए थे, लेकिन जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इससे नगर पंचायत को अपना स्थायी भवन नहीं मिल पा रहा है, जिसका सीधा असर नागरिक सुविधाओं पर पड़ रहा है।
इस गंभीर समस्या को देखते हुए अकबरनगर नगर पंचायत की मुख्य पार्षद किरण देवी ने नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश देने की मांग की है, ताकि भूमि संबंधी लंबित प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।
नागरिक सुविधाओं पर पड़ रहा सीधा असर
मुख्य पार्षद किरण देवी ने 29 अक्टूबर 2026 को भेजे गए पत्र (पत्रांक 523/26) में बताया कि प्रशासनिक भवन नगर पंचायत के सुचारु संचालन और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए बेहद जरूरी है। वर्तमान में नगर पंचायत सीमित संसाधनों के साथ काम कर रही है, जिससे रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ आम लोगों को भी काफी कठिनाई हो रही है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बिहार सरकार ने 17 अप्रैल 2025 को ही भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत कर दी थी।
अधिकारियों की लापरवाही से अटका काम
भूमि उपलब्ध कराने और उससे जुड़ी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए नगर पंचायत की ओर से लगातार अधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। इस संबंध में 18 दिसंबर 2025 (पत्रांक 378/25), 15 जून 2026 (पत्रांक 464/26) और 13 सितंबर 2026 (पत्रांक 497/26) को भी अधिकारियों से पहल करने का अनुरोध किया गया था।
इसके बाद, अपर समाहर्ता, भागलपुर ने 15 सितंबर 2026 को ज्ञापांक 5023 के माध्यम से अंचलाधिकारी, सुल्तानगंज को निर्देश दिया था कि वे सात दिनों के भीतर भूमि संबंधी मामले की रिपोर्ट दें। हालांकि, मुख्य पार्षद ने अपने पत्र में खेद व्यक्त करते हुए बताया कि इस निर्देश के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है।
मंत्री से लगाई गुहार, जल्द मिले NOC
मुख्य पार्षद किरण देवी ने नगर विकास मंत्री से आग्रह किया है कि वे अपने स्तर से मामले में हस्तक्षेप करें और संबंधित पदाधिकारियों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दें। उनका कहना है कि भूमि संबंधी लंबित प्रक्रिया पूरी होने और जिला कार्यालय से जमीन का एनओसी मिलने के बाद ही प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा। इस देरी से विकास कार्यों में बाधा आ रही है और जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
यह मामला प्रशासनिक उदासीनता का एक बड़ा उदाहरण है, जहां महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजनाएं धन स्वीकृत होने के बावजूद लंबित पड़ी हैं। नगर विकास मंत्री के हस्तक्षेप से ही इस गतिरोध को तोड़ा जा सकता है और अकबरनगर नगर पंचायत को उसका स्थायी प्रशासनिक भवन मिल सकता है।

















