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उम्र के बंधन में बड़े बेआबरू होकर तेरी गली से हम निकले…मोदी लहर में भी हाथ का कैंट किला

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उम्र के बंधन में बड़े बेआबरू होकर तेरी गली से हम निकले…मोदी लहर में भी हाथ का कैंट किलाचुनाव डेस्क, देशज टाइम्स । पिछले लोकसभा चुनाव में कानपुर सीट से कांग्रेस ने हैट्रिक लगा चुके तत्कालीन कैबिनेट मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को मैदान में उतारा था। उनके सामने भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी थे। जिसके चलते पार्टी में गुटबाजी खत्म हो गयी और एकजुट होकर कार्यकर्ताओं ने उन्हे चुनाव लड़ाया। वहीं मोदी लहर ऐसी थी कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री चारों खाते चित हो गए। हालांकि कांग्रेस का किला कैंट विधानसभा को डॉ. जोशी ध्वस्त नहीं कर सके। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी ने बढ़त लेकर एक बार फिर साबित कर दिया कि कैंट में कांग्रेस की पकड़ अभी भी मजबूत है। वहीं एक बार फिर कांग्रेस ने श्रीप्रकाश पर भरोसा जताया है तो वहीं

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Related image भाजपा ने उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचैरी को मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी ने उम्र के बंधन के चलते इस बार वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी का टिकट काट दिया है। लेकिन उन्होंने अपने अंतिम चुनाव में ऐसा रिकार्ड बनाया जो पहले कानपुर में कभी भी भाजपा नहीं कर पायी। उन्होंने पिछले लोकसभा चुनाव में अपनी नयी सीट कानपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं को ऐसा अनुशासन की घुट्टी पिलाई कि कोई भी कार्यकर्ता गुटबाजी की हिम्मत नहीं कर सका। दूसरी तरफ तत्कालीन प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी का मैजिक भी था। नरेन्द्र मोदी ने चुनाव से पहले ही कानपुर से विजय शंखनाद रैली का आगाज किया था। इससे कानपुर का चुनावी माहौल पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में बन गया था, जिसके चलते जब लोकसभा चुनाव के परिणाम आये तो तत्कालीन कैबिनेट मंत्री व कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल बुरी तरह से चुनाव हार गये।
कैंट सीट कांग्रेस के लिए है मुफीद Image result for कांग्रेस भाजपा
शहर की कैंट विधानसभा सीट लोकसभा चुनावों की दृष्टि से सदैव कांग्रेस के लिए मुफीद मानी जाती है। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी को अन्य प्रत्याशियों से बेहतर मत मिलते आ रहे हैं। जिसके चलते इस विधानसभा सीट में मोदी लहर भी भाजपा कामयाब नहीं हो सकी। यही हाल विधानसभा चुनाव 2017 में रहा और कांग्रेस के सुहैल अहमद ने भाजपा के रघुनंदन सिंह भदौरिया को शिकस्त दी थी।
हालांकि इस सीट से उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। 2012 में परिसीमन के चलते सतीश महाना ने महाराजगंज से चुनाव लड़ा और जीते भी। इसके बाद 2017 में भी इसी सीट वह दोबारा जीते। जबकि 2012 में कैंट विधानसभा से रघुनंदन सिंह भदौरिया भी जीते थे। इन सबके बावजूद लोकसभा में इस सीट से कांग्रेस को बढ़त मिली थी।
दो लाख से अधिक मतों से हुई थी जीत
2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को 2 लाख 22 हजार 946 वोटों से हराया था। डॉ. जोशी को चार लाख 74 हजार 712 वोट मिले थे और कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को दो लाख 51 हजार 766 वोट हासिल हुए थे।
चार विधानसभाओं में डॉ. जोशी को मिली बढ़त
Related image कानपुर नगर की लोकसभा सीट में पांच विधानसभाएं आती हैं और इनमें सिर्फ कैंट विधानसभा में ही कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल को 3,062 वोटों से बढ़त मिल सकी। वहीं डॉ. जोशी ने किदवईनगर व गोविंदनगर विधानसभा क्षेत्र से जीत की मजबूत आधारशिला रखी। किदवईनगर में उन्हें 1,38,625 वोट मिले, तो कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश 35,965 वोटों पर ही सिमट गए। गोविंदनगर में डॉ. जोशी को 1,24,474 व श्रीप्रकाश को 36,382 वोट मिले। इन दोनों विधान सभा क्षेत्रों में डॉ. जोशी ने कुल 1,90,752 वोटों की बढ़त बनायी। इसी तरह डॉ. जोशी ने सीसामऊ में 12,522 और आर्यनगर विधानसभा में 22,581 वोटों की बढ़त ली।
एक बार फिर आमने-सामने आये पचौरी और श्रीप्रकाश
कानपुर लोकसभा सीट पर लंबे अर्से से सीधा मुकाबला लड़ रही भाजपा और कांग्रेस ने एक बार फिर चुनावी जंग को रोचक बना दिया है। कांग्रेस ने तीन बार सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल पर दांव लगाया है। वहीं भाजपा ने भी सत्यदेव पचौरी के रुप में ऐसा मोहरा चुना है, जिन्होंने 15 साल पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में श्रीप्रकाश को करारी टक्कर दी थी। श्रीप्रकाश ने 1991, 1996 और 1998 में लगातार जीत हासिल करने वाले भाजपा के कैप्टन जगतवीर सिंह द्रोण को परास्त कर 1999 के लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस की झोली में डाली। फिर 2004 और 2009 में जीतकर हैट्रिक लगाई। मनमोहन सरकार में वह केंद्रीय मंत्री रहे। हालांकि, 2014 की मोदी लहर में श्रीप्रकाश जायसवाल डॉ. मुरली मनोहर जोशी से मुकाबले में 222946 मतों के भारी अंतर से हार गए थे।
Image result for मुरली मनोहर का छलका दर्द इधर, भाजपा ने इस जंग के लिए प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी को सबसे मजबूत माना है। एक तो पचौरी जातिगत समीकरणों में फिट माने जा रहे हैं। इसके अलावा उनका पुराना चुनावी रिपोर्ट कार्ड भी संतोषजनक है। दरअसल, भाजपा ने इससे पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में भी सत्यदेव पचौरी को उम्मीदवार बनाया था। उसमें पचौरी हारे भले ही गये हों, लेकिन वह लड़े डटकर थे। कांग्रेस के उम्मीदवार श्रीप्रकाश जायसवाल को 2,11,109 वोट, जबकि पचौरी को 2,05, 471 वोट मिले थे। हार-जीत का अंतर महज 5638 वोट का था। चूंकि 2014 के चुनाव में भाजपा बहुत बड़ी जीत हासिल कर चुकी है, इसलिए भाजपा इस टिकट के साथ काफी उत्साहित है। हालांकि अभी भी भाजपा और कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी का इंतजार कर रही है। दोनों पार्टियों के नेता इस बात की टकटकी लगाये हुए हैं कि ऐसा कौन चेहरा होगा जिससे हमें फायदा मिल सके।उम्र के बंधन में बड़े बेआबरू होकर तेरी गली से हम निकले…मोदी लहर में भी हाथ का कैंट किला

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