चंदन पांडेय, दरभंगा, देशज टाइम्स। सिद्दीकी साहब ने प्रस्ताव दिया था, मधुबनी से मैं और दरभंगा से आप दोनों लगातार दो चुनाव हार चुके हैं, इसलिए इस बार सीट बदल लीजिए। यहीं हो गया खेल, सिद्दीकी को दरभंगा तो मिल गई मगर फातमी बेचारे बे-घर हो गए। ऐसे में सवाल राजनीतिक गलियारों में यही है कि क्या सिद्धीकी ने ही तो कहीं अपना टिकट लेने के चक्कर में फातमी को धोबी पाट मार दिया। खैर अब सुनिए क्या कहते हैं राजद के तथाकथित टिकट से बहिष्कृत नेता पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री मो. अली अशरफ फातमी। फातमी को अभी भी किसी चमत्कार की आस है।
बुधवार को बहुद्देशीय भवन सभागार में दरभंगा व मधुबनी लोकसभा क्षेत्र से जुटे हजारों समर्थकों के बीच उनकी मायूसी साफ दिखी। कहा, अब मधुबनी सीट से जब तक अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं करता है तब तक वे प्रतीक्षा करेंगे। घोषणा के बाद ही समर्थकों की सलाह पर कोई निर्णय लेंगे। अब कार्यकर्ताओं को धन्यवाद देते फातमी कह रहे, खून से भी मजबूत रिश्ता दोस्ती का होता है आपने जो दोस्ती निभाई है उसे मैं याद रखूंगा। सभा में कार्यकर्ता मधुबनी के अलावा दरभंगा लोकसभा क्षेत्र से भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की मांग करते रहे तो वहां बैठे राजद किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रामनरेश यादव की नजर जमींन की ओर झुक गई तो पूर्व जिप अध्यक्ष भोला सहनी, नारद यादव, शत्रुघ्न यादव, मुस्लिम बेदारी कारवां के नजरे आलम, जिला राजद प्रवक्ता राशिद जमाल, मुखिया इरशाद आलम के सिर आसमान की ओर मंच से ही निहारती दिखी। पूछ रहे समर्थक, आखिर टिकट काटी किसने कहीं सिद्वीकी तो धोबी पाट ने नही मारा। चित बेचारे फातमी अब क्या करेंगे सबसे बड़ा सवाल। 







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