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फ़रवरी, 12, 2026

दादा कहिन ( Deshaj Times Cartoon )

मैं जन-सेवक हूं, मुझको भी, थोड़ा सा पुण्य कमाने दो, बस एक बार, मुझको सरकार बनाने दो

सरकारी दफ्तरों में बिजली का बिल, टेलीफोन का बिल, निगम का बिल सब ठंडे बस्ते में है। लाखों लाख के बकाए इन सरकारी दफ्तरों...

सीख रहा हूं मैं भी मीठा झूठ बोलने का हुनर, कड़वे सच ने हमसे, ना जाने, कितने अज़ीज़ छीन लिए

सच्चाई और इमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है लेकिन इसपर जो चल पड़े उसका जीवन जरूर सफल हो जाता है। मगर दुर्भाग्य इस...

जानवर बदहाल है, मुश्किल है मलाल है,न बोलने से हलाल है,बस निकले दम रोज और बिखरे खाल हैं

वर्षों से नगर में आवारा पशुओं की भरमार व उनके आतंक के कारण शहरवासियों को तरह-तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।आए...

सड़क पर ही ध्यान आता है साहेब कि मैं तुम्हें कुछ लिखना चाहता हूं पर क्या लिखूं सोच कर..कहता हूं

सड़क पर ही ध्यान आता है कि मैं तुम्हें कुछ लिखना चाहता हूं क्या लिखूं सोच कर, किसी एक विषय पर ध्यान टिकाता हूं,...
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हाल मेरा सुनो साहब, खाली कंधे हैं इन पर कुछ भार चाहिए,  बेरोजगार हूं साहब मुझे रोजगार चाहिए

संयुक्त राष्ट्र श्रम रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में भारत में 1.77 करोड़ युवा बेरोजगार थे जबकि 2017 में युवा बेरोजगारों की संख्या 1.80 करोड़...

ये विकास का कचरा है, या कचरे का विकास है,दोनों एक दूसरे पर बदबू फैलाने का आरोप लगा रहे हैं

एक शादी में एक वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली से अर्से बाद दरभंगा आए। स्टेशन पर उतरकर सीधे दरभंगा टावर के एक नामचीन होटल पहुंचने के...

किसने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी है, ऐसी प्यास और ऐसा सब्र दरिया पानी पानी है

जल ही जीवन जल सा जीवन,जल्दी ही जल जाओगे,अगर न बची जल की बूंदें, कैसे प्यास बुझाओगे। नाती-पोते खड़े रहेंगे जल, राशन की कतारों...

बिना कमीशन काम न होता,यही डॉक्टरों की कमाई है, रुक जाता है, कहकर फ़ौरन देखो भाई ऐसा है…

स्वास्थ्य की मंडी में दलालों की चांदी है। जो जितना बड़ा दलाल उसकी डॉक्टरों तक वैसी पहुंच। मरीज जाए भाड़ में डॉक्टरों को बस...
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बड़ी बड़ी बातें तो कर लीं, छोटी बात भूला दी है किस प्रकार की अलमस्ती है, ये कैसी आज़ादी है

गंदगी धेाने में थोड़ा हाथ मैला हो गया, पर, मेरा पानी से रिश्ता और गहरा हो गया। ये अंधेरा ही न होता तो बताओ...

जमाना बीत चुका जब, डॉक्टर नेक नीयती से कमाते थे,अपना जीवन मानवता की सेवा में बिताते थे

बीमारी में डॉक्टर के पास जाने की परंपरा है, लेकिन डॉक्टर केवल निमित्त है। यह निमित्त चाहे झोलाछाप हो या डिग्रीधारी, निमित्त केवल निमित्त...

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