चुनाव डेस्क, देशज टाइम्स । पिछले लोकसभा चुनाव में कानपुर सीट से कांग्रेस ने हैट्रिक लगा चुके तत्कालीन कैबिनेट मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को मैदान में उतारा था। उनके सामने भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी थे। जिसके चलते पार्टी में गुटबाजी खत्म हो गयी और एकजुट होकर कार्यकर्ताओं ने उन्हे चुनाव लड़ाया। वहीं मोदी लहर ऐसी थी कि तत्कालीन कैबिनेट मंत्री चारों खाते चित हो गए। हालांकि कांग्रेस का किला कैंट विधानसभा को डॉ. जोशी ध्वस्त नहीं कर सके। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी ने बढ़त लेकर एक बार फिर साबित कर दिया कि कैंट में कांग्रेस की पकड़ अभी भी मजबूत है। वहीं एक बार फिर कांग्रेस ने श्रीप्रकाश पर भरोसा जताया है तो वहीं
कैंट सीट कांग्रेस के लिए है मुफीद
शहर की कैंट विधानसभा सीट लोकसभा चुनावों की दृष्टि से सदैव कांग्रेस के लिए मुफीद मानी जाती है। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी को अन्य प्रत्याशियों से बेहतर मत मिलते आ रहे हैं। जिसके चलते इस विधानसभा सीट में मोदी लहर भी भाजपा कामयाब नहीं हो सकी। यही हाल विधानसभा चुनाव 2017 में रहा और कांग्रेस के सुहैल अहमद ने भाजपा के रघुनंदन सिंह भदौरिया को शिकस्त दी थी।
हालांकि इस सीट से उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सतीश महाना लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। 2012 में परिसीमन के चलते सतीश महाना ने महाराजगंज से चुनाव लड़ा और जीते भी। इसके बाद 2017 में भी इसी सीट वह दोबारा जीते। जबकि 2012 में कैंट विधानसभा से रघुनंदन सिंह भदौरिया भी जीते थे। इन सबके बावजूद लोकसभा में इस सीट से कांग्रेस को बढ़त मिली थी।
दो लाख से अधिक मतों से हुई थी जीत
2014 के लोकसभा चुनाव में डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को 2 लाख 22 हजार 946 वोटों से हराया था। डॉ. जोशी को चार लाख 74 हजार 712 वोट मिले थे और कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को दो लाख 51 हजार 766 वोट हासिल हुए थे।
चार विधानसभाओं में डॉ. जोशी को मिली बढ़त
एक बार फिर आमने-सामने आये पचौरी और श्रीप्रकाश
कानपुर लोकसभा सीट पर लंबे अर्से से सीधा मुकाबला लड़ रही भाजपा और कांग्रेस ने एक बार फिर चुनावी जंग को रोचक बना दिया है। कांग्रेस ने तीन बार सांसद रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल पर दांव लगाया है। वहीं भाजपा ने भी सत्यदेव पचौरी के रुप में ऐसा मोहरा चुना है, जिन्होंने 15 साल पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में श्रीप्रकाश को करारी टक्कर दी थी। श्रीप्रकाश ने 1991, 1996 और 1998 में लगातार जीत हासिल करने वाले भाजपा के कैप्टन जगतवीर सिंह द्रोण को परास्त कर 1999 के लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस की झोली में डाली। फिर 2004 और 2009 में जीतकर हैट्रिक लगाई। मनमोहन सरकार में वह केंद्रीय मंत्री रहे। हालांकि, 2014 की मोदी लहर में श्रीप्रकाश जायसवाल डॉ. मुरली मनोहर जोशी से मुकाबले में 222946 मतों के भारी अंतर से हार गए थे।









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