Bhagalpur Boat News: भागलपुर में मंगलवार को गंगा नदी में उस वक्त हड़कंप मच गया जब यात्रियों से भरी एक नाव अचानक खराब हो गई और तेज धारा में बहने लगी। इस घटना से नाव पर सवार लोगों में दहशत फैल गई, लेकिन राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की त्वरित कार्रवाई ने एक बड़े हादसे को टाल दिया। एसडीआरएफ की तत्परता और सूझबूझ से सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया।
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बीच गंगा में अचानक बंद हुआ इंजन, मची अफरा-तफरी
जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार दोपहर की है जब महादेवपुर घाट से बरारी घाट की ओर जा रही एक बड़ी नाव गंगा नदी के बीच में तकनीकी खराबी का शिकार हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि नाव का इंजन अचानक बंद हो गया, जिसके बाद नाव नदी की तेज धारा में अनियंत्रित होकर बहने लगी। नाव इंजीनियरिंग कॉलेज की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही थी, जिससे उस पर सवार यात्रियों में घबराहट और अफरा-तफरी मच गई। कई यात्रियों ने तुरंत मोबाइल फोन के जरिए स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ को सूचना दी।
इंजन बंद होने के बाद नाव पूरी तरह से नदी की मर्ज़ी पर थी, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था। यात्रियों को अपनी जान का डर सताने लगा था क्योंकि नाव लगातार नदी के बहाव के साथ दूर होती जा रही थी। इस स्थिति ने सभी को चिंता में डाल दिया था।
SDRF का त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन, सभी सुरक्षित
सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, भागलपुर की टीम इंस्पेक्टर नीलू के नेतृत्व में तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गई। टीम ने बिना समय गंवाए नाव तक पहुंचने की रणनीति बनाई और बचाव अभियान शुरू किया। सबसे पहले टीम ने नाव पर सवार बीमार महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित बाहर निकाला। एसडीआरएफ के जवानों ने अत्यंत कुशलता और धैर्य के साथ चरणबद्ध तरीके से सभी यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित रूप से बरारी घाट तक पहुंचाया। इस घटना में किसी भी यात्री के हताहत होने की कोई खबर नहीं है, जो बिहार SDRF News की एक बड़ी सफलता है।
सभी यात्रियों को सुरक्षित निकालने के बाद, एसडीआरएफ टीम ने खराब हुई नाव को भी किनारे लाने का काम शुरू किया। इसके लिए एक अन्य बड़ी नाव की व्यवस्था की गई, जिसकी मदद से खराब नाव को टोचन कर कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित किनारे तक लाया गया। नाव का संचालन रामजी मंडल कर रहे थे, जबकि इसके मालिक पवन मंडल बताए जाते हैं।
प्रशासन का कड़ा संदेश: नाव मालिकों पर नकेल
इस घटना के बाद प्रशासन ने नाव संचालन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और सख्त संदेश जारी किया है। एक नई व्यवस्था लागू की गई है जिसके तहत यदि किसी नाव का इंजन बीच नदी में खराब होता है और यात्रियों को बचाने के लिए एसडीआरएफ की मदद लेनी पड़ती है, तो संबंधित नाव मालिक को एसडीआरएफ द्वारा खर्च की गई निर्धारित राशि का केवल आधा भुगतान ही किया जाएगा। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि नाव मालिक अपनी नावों का नियमित रखरखाव और उनकी तकनीकी जांच सुनिश्चित करें।
प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस नई व्यवस्था से नाव मालिकों को अपनी जिम्मेदारी का अधिक अहसास होगा और वे सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी और गंगा नदी में नाव यात्रा अधिक सुरक्षित हो पाएगी।
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