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Bhagalpur News: भागलपुर के मछुआरों की बात मत पूछो जी…Fish Farming आत्मनिर्भरता की नई आधुनिक संसाधन से हुए लैस!

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Fish Farming: बिहार के भागलपुर में अब मछली पालन सिर्फ परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि आर्थिक क्रांति का नया अध्याय लिख रहा है। जिला प्रशासन की पहल से मछुआरों के दिन बदल रहे हैं और उन्हें आधुनिक संसाधनों से लैस किया जा रहा है। जानिए कैसे भागलपुर बन रहा बिहार का मत्स्य हब।

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आधुनिक संसाधनों से लैस हुए मछुआरे

भागलपुर, जो कभी अपने सिल्क के लिए जाना जाता था, अब मछली उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। जिले को मत्स्य विपणन में अग्रणी बनाने के लिए मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के तहत एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम समीक्षा भवन में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने 121 लाभार्थियों को आधुनिक किट और संसाधन वितरित किए। इनमें बड़ी हांडी, वेइंग मशीन, मछली पकड़ने के जाल, छोटे फ्रीजर और अन्य आवश्यक उपकरण शामिल थे। इन संसाधनों से मछुआरों को अपनी उपज को बेहतर ढंग से संरक्षित करने और अधिक मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। पहले उन्हें कम दाम पर मछली बेचनी पड़ती थी, लेकिन फ्रीजर मिलने से यह समस्या हल हो गई है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। अधिक उत्पादन करने वाले मछुआरों को अपनी मछलियां सीधे बाजार तक पहुंचाने के लिए ऑटो भी दिए गए हैं, जिससे बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम होगी।

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Fish Farming: आत्मनिर्भरता की राह पर भागलपुर

जिला प्रशासन भागलपुर को सिल्क सिटी के साथ-साथ बिहार के प्रमुख मछली उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में बिहपुर में लगभग 50 लाख रुपये की लागत से एक आधुनिक हैचरी प्लांट विकसित किया गया है। यह प्लांट उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज का उत्पादन करेगा, जिससे अब भागलपुर को मछली बीज के लिए आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में नए तालाबों का निर्माण किया जा रहा है और मछुआरों को वैज्ञानिक तरीके से Fish Farming की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। इस Aquaculture पहल से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि मछुआरे आत्मनिर्भर भी बनेंगे।

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मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा के उपाय

नदी में काम करने वाले मछुआरों की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए उन्हें लाइफ जैकेट उपलब्ध कराए जा रहे हैं और नाव खरीदने पर सब्सिडी की व्यवस्था भी की गई है। इन उपायों से मछुआरों का जीवन सुरक्षित होगा और वे बिना किसी डर के अपना काम कर पाएंगे। भागलपुर में Aquaculture के इस विकास से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह पूरे बिहार के लिए एक मॉडल भी साबित होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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