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मार्च, 11, 2026
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Bhagalpur News: मूल्यांकन में लापरवाही, 45 शिक्षक अनुपस्थित, बिहार बोर्ड की साख पर सवाल!

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Bhagalpur News: शिक्षा के महाकुंभ में जब इम्तिहान की बारी आई, तो कुछ गुरुजन अपनी ड्यूटी से नदारद दिखे। यह सिर्फ अनुपस्थिति नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य पर सवालिया निशान है।

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Bhagalpur News: मूल्यांकन में लापरवाही, 45 शिक्षक अनुपस्थित, बिहार बोर्ड की साख पर सवाल!

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बिहार के भागलपुर जिले में मैट्रिक और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक प्रक्रिया के दौरान कुल 45 शिक्षक निर्धारित मूल्यांकन केंद्र सीएमएस स्कूल से अनुपस्थित पाए गए। इन शिक्षकों की गैर-मौजूदगी ने बिहार बोर्ड की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह एक ऐसा कदम है जो छात्रों के भविष्य से सीधा खिलवाड़ माना जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Bhagalpur News: शिक्षा विभाग की सख्ती और अनुपस्थित शिक्षकों पर कार्रवाई

शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी अनुपस्थित शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि, प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन शिक्षकों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाया गया है। यह स्थिति मूल्यांकन कार्य के प्रति उनके गैर-जिम्मेदाराना रवैये को दर्शाती है, जो कि शिक्षण जैसे पवित्र पेशे के लिए बेहद चिंताजनक है।

इस गंभीर अनियमितता के बाद, शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे शिक्षकों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मूल्यांकन कार्य में अनुपस्थिति सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों की सटीकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह मूल्यांकन कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही की दरकार

शिक्षकों की इस तरह की लापरवाही न केवल शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालती है बल्कि छात्रों और अभिभावकों के बीच भी निराशा का संचार करती है। सही और समय पर मूल्यांकन कार्य सुनिश्चित करना बोर्ड की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, और इसमें किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस मामले में आगे की कार्रवाई क्या होती है, यह देखने वाली बात होगी।

यह घटना एक बार फिर शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करती है। जहां एक ओर बिहार बोर्ड परीक्षाओं को सुचारु और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, वहीं कुछ शिक्षकों की ऐसी हरकतें इन प्रयासों पर पानी फेर देती हैं। यह मुद्दा सिर्फ मूल्यांकन कार्य की गुणवत्ता को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि पूरे शिक्षण समुदाय की प्रतिष्ठा को भी धूमिल करता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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