
Bharat Bandh: सड़कों पर सन्नाटा और बैंकों पर ताले, भागलपुर ने भी देखी देशव्यापी हड़ताल की वो गूंज जिसने सरकारी नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और किसानों के समर्थन से बुलाए गए इस बंद का असर भागलपुर में स्पष्ट रूप से देखने को मिला। शहर के मुख्य बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों तक स्थित बैंकों की शाखाओं पर ताले लटके रहे, जिससे बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हुईं। बैंक कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर शाखाओं के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस प्रदर्शन के कारण आम लोगों को पैसे के लेनदेन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
क्यों हुआ Bharat Bandh और क्या हैं मांगें?
यह राष्ट्रव्यापी हड़ताल मुख्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा पिछले साल लागू किए गए चार नए श्रम कोड के विरोध में आयोजित की गई थी। इन नए कोड ने 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह ली है। प्रदर्शन में शामिल इंटक, एआईटीयूसी, एचएमएस, और सीआईटीयू जैसी प्रमुख ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि नए श्रम कानून कर्मचारियों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। यूनियनों के अनुसार, इन कानूनों से नौकरी की सुरक्षा में कमी आई है और मालिकों को कर्मचारियों को काम पर रखने या निकालने में अधिक छूट मिल गई है, जो श्रमिकों के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी, आंदोलन की चेतावनी
भागलपुर में बैंकों के बंद रहने से आम उपभोक्ताओं और व्यापारियों को दिनभर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। एटीएम में भी नकदी की समस्या देखने को मिली। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने स्पष्ट रूप से सरकार से इन श्रम कोड को तत्काल वापस लेने की मांग की। उनकी मांगों में श्रमिकों के हितों की रक्षा करना और रोजगार सुरक्षा को पहले की तरह सुनिश्चित करना शामिल है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यूनियन नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगें जल्द से जल्द नहीं मानी गईं, तो वे अपने इस आंदोलन को और भी तेज करने पर मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।






