spot_img

Bihar Mid Day Meal Worker Protest: ‘अब और नहीं!’, 10000 मानदेय के लिए पटना में गरजेंगी रसोइया, सरकार की बढ़ी टेंशन

spot_img
- Advertisement -

Bihar Mid Day Meal Worker Protest: चूल्हे की आंच से उठकर अब सड़क पर संघर्ष की तैयारी है, जब बिहार की हजारों विद्यालय रसोइया अपने हक की आवाज बुलंद करने पटना पहुंचेंगी। आगामी 24 फरवरी को राज्य की राजधानी पटना का गर्दनीबाग एक बड़े प्रदर्शन का गवाह बनेगा, जहां सरकारी विद्यालयों में कार्यरत रसोइया अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी आवाज उठाएंगी।

- Advertisement -

Bihar Mid Day Meal Worker Protest: जानिए क्या हैं रसोइयों की प्रमुख मांगें

एक्टू से सम्बद्ध बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में राज्य भर से विद्यालय रसोइयों के शामिल होने की उम्मीद है। संघ की मुख्य मांगों में रसोइयों के लिए 10,000 रुपये का मासिक मानदेय, उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना से गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को बाहर करना और मजदूर विरोधी लेबर कोड कानूनों को रद्द करना शामिल है।

- Advertisement -

एक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि सरकार इन महिला कर्मियों के प्रति पूरी तरह उदासीन है। उन्होंने बताया, “सरकार रसोइयों को न तो कोई सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराती है और न ही स्वास्थ्य बीमा व पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाएं देती है। उन्हें काम करने के लिए ड्रेस तक नहीं दी जाती। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यूनतम मजदूरी से भी काफी कम मानदेय पर काम करने वाली इन महिलाओं को मातृत्व अवकाश तक का अधिकार नहीं दिया गया है।” आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

- Advertisement -
यह भी पढ़ें:  Bhagalpur News: भागलपुर से ऐतिहासिक Hajj Yatra का पहला काफिला रवाना, 135 यात्री मदीना के लिए भरेंगे उड़ान

घटती संख्या और बढ़ता शोषण

संघ ने इस बात पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है कि बिहार में लगातार एनजीओ को बढ़ावा दिया जा रहा है, जबकि उनके द्वारा आपूर्ति किए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद घटिया होती है। कई बार ऐसा देखा गया है कि इस भोजन को खाकर बच्चे बीमार पड़ जाते हैं या वे इसे खाने से ही इनकार कर देते हैं। मुकेश ने कहा कि इस व्यवस्था में ऊपर से नीचे तक केवल भ्रष्टाचार व्याप्त है।

सरकारी नीतियों के कारण पिछले पांच वर्षों में विद्यालय रसोइयों की संख्या में लगभग 50 हजार की कमी आई है, जो महिला सशक्तिकरण के दावों पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। शिक्षा मंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए बयान के अनुसार, पांच साल पहले ढाई लाख की संख्या अब घटकर केवल दो लाख रह गई है। एक तरफ रसोइयों की नई बहाली बंद है और दूसरी तरफ उन्हें विभिन्न बहाने बनाकर जबरन रिटायर किया जा रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

चुनावों से ठीक पहले वोट के लिए मानदेय में मामूली बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन वह भी समय पर नहीं मिलता। यह बढ़ा हुआ मानदेय भी सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम मजदूरी से काफी कम है। रसोइयों पर काम का बोझ लगातार बढ़ाया जा रहा है और कई जगहों पर उनसे झाड़ू लगवाने और शौचालय साफ करवाने जैसे काम भी कराए जाते हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 24 फरवरी के प्रदर्शन के बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो इस आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा। प्रदर्शन की तैयारी जोर-शोर से चल रही है और रसोइयों के बीच इसका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

- Advertisement -

जरूर पढ़ें

Anant Singh News: निशांत पर छोटे सरकार का बड़ा बयान, कह दी बड़ी बात, पढ़िए शराबबंदी पर अनंत सिंह का नया सुझाव!

Anant Singh: बिहार की राजनीति में फिर उबाल! मोकामा विधायक अनंत सिंह ने हालिया...

Bihar School Video Viral: हेडमास्टर को पंखा झलती छात्राएं, कुदाल चलाता छात्र… बगहा के स्कूल का वायरल वीडियो देख भड़के लोग!

Bihar School Video Viral: बिहार के सरकारी स्कूलों में सुधार के बड़े-बड़े दावों के...