
टेक्निकल खामी ने रोकी राजस्व की रफ्तार, निगम को लगा झटका…स्मार्ट सिटी का ऐप, देहाती सिस्टम — टैक्स भरने को तरस रहे भागलपुरवासी, डिजिटल इंडिया का सपना भागलपुर नगर निगम के होल्डिंग टैक्स ऐप पर आकर हांफ गया है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत 22 अप्रैल से शुरू हुई ऑनलाइन टैक्स वसूली व्यवस्था तकनीकी खामियों के कारण बुरी तरह लड़खड़ा गई है। कर वसूलने वाले कर्मी घर-घर भटक रहे हैं, लोग टैक्स देने को तैयार खड़े हैं, पर सिस्टम “डेटा नॉट फाउंड” दिखाकर लौटा रहा है।
अब तक की हकीकत ये है:
लक्ष्य: 2 करोड़ रुपये
- Advertisement -वसूली: 97.80 लाख रुपये ही
- Advertisement -पोर्टल पर रजिस्टर होल्डिंग: 71,600+
ऑनलाइन वसूली: 22.65 लाख
नकद वसूली: 32.80 लाख
पाउस मशीन: 4.55 लाख
पोर्टल पर दर्ज हजारों होल्डिंग धारकों का पूरा डाटा अपलोड ही नहीं हुआ। कर संग्रहक जब घर पहुंचते हैं और होल्डिंग नंबर सर्च करते हैं तो स्क्रीन पर “डाटा नॉट फाउंड” चमकता है। एक घर पर आधा घंटा इंतजार, लोगों का गुस्सा, और आखिर में बिना टैक्स लिए वापसी। कई लोग टैक्स देने को तैयार हैं, पर समय लगने के कारण मायूस होकर लौट जाते हैं।
ऐप में झोल ही झोल

नगर विकास एवं आवास विभाग ने अक्टूबर 2025 में अस्पताल, मैरिज हॉल, होटल जैसी श्रेणियों पर टैक्स बढ़ाने का आदेश दिया था। लेकिन सिस्टम में ये अपडेट ही नहीं हुआ। भवन और खाली प्लॉट का अलग-अलग एरिया भी ऐप में नहीं दिख रहा। लोगों की मांग है कि निर्माण और खाली जमीन का टैक्स अलग-अलग दिखे, वरना गड़बड़ी तय है।
कर संग्रहक भी परेशान हैं। बार-बार आईडी लॉगआउट हो जाती है, ओटीपी (OTP) नहीं आता, और टारगेट पूरा न होने पर तनख्वाह कटती है।
लाजिकूफ कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर अमित कुमार श्रीवास्तव मानते हैं कि तकनीकी दिक्कतें हैं और टीम काम कर रही है। नगर आयुक्त कुणाल कुशवाहा ने कंपनी को अल्टीमेटम दिया है कि घर-घर जाकर वसूली सुनिश्चित करे, वरना स्पष्टीकरण देना होगा।
ये सिर्फ भागलपुर की कहानी नहीं
पटना: 2018 में निजी एजेंसी पर अवैध वसूली के आरोप लगे। राजीव नगर में बिना कागजात के टैक्स मांगा गया।
रांची: 2025 में आवासीय टैक्स देकर व्यवसाय करने वालों पर शत-प्रतिशत जुर्माना लगाने का आदेश हुआ।
चतरा: 2026 में रेट कम होने के इंतजार में लोग टैक्स रोक बैठे, 1.36 करोड़ के लक्ष्य में 1.15 करोड़ ही वसूल हो पाया।
ये सिर्फ आंकड़े नहीं, हर घर की पीड़ा है
ये खबर सिर्फ नगर निगम और एजेंसी की कहानी नहीं है। ये हर उस आम आदमी की कहानी है जो “डिजिटल इंडिया” के नाम पर रोज ठोकर खा रहा है।

1. मजदूर रामू की पीड़ा:
रामू के पास 400 वर्गफीट का छोटा मकान है। बेटी की शादी के लिए उसने 500 रुपये अलग रखे थे। टैक्स भरने गया तो ऐप में नाम नहीं मिला। 3 बार निगम ऑफिस के चक्कर काटे, मजदूरी छूटी। आखिर में एजेंट ने 200 रुपये “सुविधा शुल्क” मांगा। रामू ने कहा,
“स्मार्ट सिटी है साहब, पर हम तो आज भी लाइन में खड़े हैं।”
2. रिटायर्ड टीचर शकुंतला देवी की पीड़ा:
शकुंतला देवी को मोबाइल चलाना नहीं आता। बेटा बाहर कमाता है। टैक्स का SMS आया, लिंक पर क्लिक किया तो OTP नहीं आया। 2 दिन बाद बकाया पर ब्याज लग गया। कहती हैं,
“पेंशन से 1000 रुपये कटे तो घर का राशन घटेगा। सिस्टम हम बूढ़ों के लिए नहीं बना है।”
3. दुकानदार अर्जुन की पीड़ा:

वार्ड 35 वाले अर्जुन के प्लॉट पर मकान 600 वर्गफीट है। पिछले साल 1313 रुपये टैक्स था, इस साल ऐप में 832 रुपये दिखा रहा है। अब डर है कि बाद में निगम कहेगा “गलती से कम लगा, बकाया ब्याज सहित दो।” कहता है,
“गलती सिस्टम की, मार हमको पड़ेगी।”
4. कर वसूलने वाले कर्मचारी की पीड़ा:
एक कर संग्रहक बताता है, “सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक घर-घर घूमते हैं। 50 घर में 20 घर पर ऐप नहीं चलता। लोग गाली देते हैं, कहते हैं सरकारी बाबू होकर भी कुछ नहीं कर सकते। तनख्वाह 12 हजार, और टार्गेट पूरा न हो तो कटौती।”
5. शहर की पीड़ा:
जब टैक्स नहीं वसूलेगा तो सड़क नहीं बनेगी, नाली नहीं साफ होगी, स्ट्रीट लाइट नहीं जलेगी। होल्डिंग टैक्स से ही पार्क, पानी, सफाई का पैसा आता है। सिस्टम की गड़बड़ी का खामियाजा पूरा शहर भुगतेगा।
देशभर की वही कहानी
पटना में एजेंसी ने अवैध वसूली की, चतरा में लोग रेट कम होने के इंतजार में टैक्स रोक बैठे, रांची में आवासीय को कमर्शियल बताकर जुर्माना ठोका गया।

हर जगह वही दर्द: सरकार ऐप लॉन्च करती है, एजेंसी ठेका लेती है, और आम जनता बीच में पिसती है।
सवाल ये नहीं कि ऐप बना या नहीं। सवाल ये है कि ऐप बना किसके लिए?
अगर अर्जुन, शकुंतला देवी और रामू को राहत नहीं मिली, तो स्मार्ट सिटी सिर्फ कागज पर स्मार्ट रह जाएगी।

अब जरूरत है कि नगर निगम सिर्फ कंपनी को नोटिस न दे, बल्कि जमीन पर उतरकर हर वार्ड में कैंप लगाए। डाटा ठीक करे, लोगों को समझाए, और वादा करे कि
“गलती सिस्टम की, सजा जनता की नहीं होगी।”
वरना 2 करोड़ का टारगेट तो दूर, 97 लाख भी बोझ लगेगा।







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