
Bailey Bridge: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर टूटे हिस्से की वजह से आवाजाही बंद होने से परेशान लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सीमा सड़क संगठन (BRO) ने युद्धस्तर पर काम करते हुए क्षतिग्रस्त हिस्से से 7.8 मीटर पीछे से Bailey Bridge बनाने का फैसला किया है। यह कदम उत्तरी और दक्षिणी बिहार के बीच टूटी कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
क्षतिग्रस्त हिस्से से 7.8 मीटर पीछे बनेगा Bailey Bridge
बीआरओ की टीम ने बुधवार को दूसरे दिन भी अभियंताओं के साथ सेतु के ऊपरी और अंदरूनी हिस्से की गहन जांच की। भागलपुर और नवगछिया दोनों तरफ पुल के अलग-अलग स्थानों पर मशीन से सतह की जांच की गई। इस जांच में सामने आया कि क्षतिग्रस्त हिस्से से कुछ दूरी पर पुल का स्ट्रक्चर मजबूत है। तकनीकी आकलन के लिए टीम ने मौके पर सटीक मापी भी कराई। बीआरओ के अधिकारियों के अनुसार, क्षतिग्रस्त स्थल से 7.8 मीटर की दूरी से गर्डर पुल यानी अस्थायी मार्ग का निर्माण कराया जाएगा, ताकि कंपन का कोई खतरा न हो।
डिजाइन और उपकरण: 10 दिन में तैयार होगा अस्थायी मार्ग
जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही डिजाइन तैयार होगा और उसके बाद ही निर्माण की दिशा में पहल की जाएगी। इस पुल के निर्माण के लिए आवश्यक उपकरण सिलीगुड़ी या कोलकाता से मंगाए जाएंगे। सामग्रियों को मौके तक पहुंचने में दो-तीन दिन का समय लग सकता है।
अधिकारियों का अनुमान है कि इस अस्थायी मार्ग को बनाने में लगभग 10 दिन का समय लग सकता है। इस पर जल्द ही निर्णय लिया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। बीआरओ के अधिकारियों ने यह भी बताया कि स्लैब के अंदरूनी हिस्से (बाकश) का बीम काफी मजबूत है, और उसी बीम के ऊपर से गर्डर ब्रिज का काम शुरू होगा। यह काम पुल के दोनों हिस्सों में किया जाएगा।
छोटे वाहनों को मिलेगी इजाजत, उत्तर-दक्षिण बिहार को राहत
जिस तरह सेना दुर्गम और आपदा प्रभावित इलाकों में अस्थायी पुल और वैकल्पिक रास्ते तैयार करती है, उसी तर्ज पर विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से पर भी एक प्रभावी अस्थायी मार्ग बनाया जा सकता है। हालांकि, यह तय किया गया है कि शुरुआत में इस वैकल्पिक मार्ग पर केवल छोटे वाहन ही चलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि निर्णय के बाद ही डिजाइन तैयार किया जाएगा कि कितने क्षमता वाले वाहनों का इस पर संचालन किया जाएगा।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।यदि यह योजना लागू होती है तो उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवाजाही काफी हद तक बहाल हो सकती है। इस पुल के माध्यम से खगड़िया, सहरसा, पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार और बांका जैसे जिलों के अलावा झारखंड के कई क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि सेतु का एक हिस्सा गंगा में समा गया है और नवगछिया-भागलपुर के बीच संपर्क पूरी तरह से बाधित है। एनएच (साउथ) विंग बिहार के चीफ इंजीनियर संजय भारती ने जानकारी देते हुए बताया कि टीम मौके पर पहुंचकर विस्तृत जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। यदि तकनीकी रूप से अनुमति मिलती है, तो आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है और यह Bailey Bridge बनकर तैयार हो जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







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