बेनीपुर तदर्थ शिक्षक: बहेड़ा महाविद्यालय में कार्यरत डेढ़ दर्जन तदर्थ शिक्षकों और कर्मियों को बड़ा झटका लगा है। शासी निकाय ने उनकी सेवा तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी है। इस फैसले से कॉलेज परिसर में हड़कंप मच गया है और कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। प्रभारी प्रधानाचार्य विनोदानंद चौधरी ने इसकी जानकारी दी है।
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‘अवैध’ नियुक्ति पर चला चाबुक
प्रभारी प्रधानाचार्य विनोदानंद चौधरी ने बताया कि वर्तमान शासी निकाय ने पूर्व से कार्यरत लगभग डेढ़ दर्जन तदर्थ शिक्षक एवं कर्मियों की नियुक्ति को विधि सम्मत नहीं माना है। 13 मई को हुई शासी निकाय की बैठक के प्रस्ताव संख्या 6 में लिए गए निर्णय के आलोक में शनिवार को सेवा समाप्ति संबंधी पत्र जारी कर दिया गया है। गौरतलब है कि सचिव सुरेश प्रसाद सिंह एवं अध्यक्ष राम नारायण ठाकुर के कार्यकाल में विश्वविद्यालय के निर्देश पर 9 शिक्षक और आधा दर्जन से अधिक चतुर्थ वर्गीय कर्मियों की बहाली की गई थी, जिसे वर्तमान निकाय ने अब अवैध करार दिया है।
बेनीपुर तदर्थ शिक्षक: कर्मचारियों में गहरा आक्रोश, भविष्य पर संकट
एक साल से अधिक समय से कार्यरत इन सदस्यों और कर्मियों में निकाय के इस आदेश से काफी आक्रोश दिख रहा है। उनका कहना है कि उनकी बहाली विश्वविद्यालय के निर्देश के आलोक में हुई थी और वे विधिवत कार्य कर रहे थे। उन्हें महाविद्यालय के आंतरिक कोष से मानदेय भी समय पर मिलता रहा है। हालांकि, पिछले 9 माह से उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है। वर्तमान निकाय द्वारा पिछला भुगतान किए बिना ही सेवा समाप्ति की नोटिस जारी करने को वे विधि सम्मत नहीं बता रहे हैं।
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कॉलेज के शैक्षणिक कार्यों पर क्या होगा असर?
प्रभारी प्राचार्य ने बताया कि शिक्षकों को 8000, लिपिक को 6000 और आदेशपाल को 5500 मानदेय का भुगतान किया जाता रहा है। उनके बकाए भुगतान के लिए शासी निकाय को लिखा गया है और निर्देश मिलने पर भुगतान किया जाएगा। साथ ही उन्होंने चिंता व्यक्त की कि गृष्मावकाश के बाद महाविद्यालय खुलते ही इन शिक्षकों और कर्मियों के अभाव के कारण शैक्षणिक एवं अन्य कार्य प्रभावित होना तय है। यह फैसला कॉलेज के भविष्य और छात्रों की पढ़ाई पर बड़ा असर डाल सकता है।
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इस बड़े फैसले ने बेनीपुर तदर्थ शिक्षक और कर्मियों के भविष्य पर सवाल खड़ा कर दिया है और बहेड़ा कॉलेज में अनिश्चितता का माहौल बन गया है।







