
आम निर्यात: बिहार के जाले में किसानों को एक ऐसा खास प्रशिक्षण मिला है, जो उनकी किस्मत बदल सकता है। भारत सरकार की कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के सहयोग से कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में “अच्छी कृषि क्रियाओं से आम का उत्पादन एवं उसका निर्यात” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. दिव्यांशु शेखर ने की। इस पहल का उद्देश्य किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में आम निर्यात के लिए तैयार करना है।
आम की वैज्ञानिक खेती और रोग नियंत्रण
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार विश्वकर्मा ने किसानों को आम की वैज्ञानिक खेती, रोग नियंत्रण और रसायनों के सुरक्षित उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि फलों की तुड़ाई रसायनों का प्रभाव पूरी तरह समाप्त होने के बाद ही करनी चाहिए, ताकि आम निर्यात के दौरान खेप अस्वीकृत न हो। मिट्टी की उर्वरा शक्ति और अन्य कृषि क्रियाओं की जानकारी प्रक्षेत्र प्रबंधक डॉ. चंदन कुमार ने दी, जबकि श्रीमती शशिमाला कुमारी ने मिट्टी जांच के फायदे बताए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
निर्यात के लिए सरकारी सहायता और उत्पाद प्रसंस्करण
एपीडा के एसोसिएट सौरभ कुमार ने आम निर्यात और उसके मूल्यवर्धित उत्पादों में मिलने वाली सरकारी सहायता और इसकी पूरी जांच प्रक्रिया से किसानों को अवगत कराया। वैज्ञानिक डॉ. पूजा कुमारी ने आमरस, आमपापड़, शरबत, जैम, जेली और अचार जैसे उत्पाद तैयार कर किसानों की आय बढ़ाने पर जोर दिया। प्रशिक्षण में जाले, सिंहवाड़ा और दरभंगा सदर प्रखंड के 10 गांवों के किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।







