Darbhanga Flood News: दरभंगा जिले में संभावित बाढ़ के खतरों से निपटने के लिए तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। प्रभारी मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए गए, जिससे बाढ़ के दौरान होने वाले नुकसान को कम किया जा सके और आमजन को राहत मिल सके। इस बैठक में जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति ने बाढ़ से बचाव और राहत कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए।आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
बाढ़ कार्ययोजना और तैयारियों की समीक्षा
पथ निर्माण विभाग के मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र, जो दरभंगा जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं, ने 12 जून को समाहरणालय स्थित सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय में जिला कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने संभावित बाढ़ वर्ष 2026 के लिए तैयार की गई एक विस्तृत कार्ययोजना पुस्तिका का विमोचन किया। इस पुस्तिका में बाढ़ से निपटने के लिए विभिन्न विभागों की भूमिका और कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया गया है, ताकि सभी तैयारियां समय पर पूरी हो सकें।
मंत्री ने सभी अंचलों को विशेष रूप से निर्देश दिए कि वे कम से कम 500 पॉलीथीन शीट्स की अतिरिक्त उपलब्धता सुनिश्चित करें। ये शीट्स बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी आश्रय और सामग्री की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं। पश्चिमी कोशी नहर प्रमंडल, दरभंगा के कार्यपालक अभियंता को सख्त हिदायत दी गई कि वे सुनिश्चित करें कि नहरों का पानी हर हाल में किसानों के खेतों तक पहुंचे, जिससे कृषि को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
इसके साथ ही, जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंताओं को विधानसभावार 75 संवेदनशील स्थलों की सूची जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा गया है। इन स्थलों की पहचान बाढ़ के दौरान अत्यधिक जोखिम वाले क्षेत्रों के रूप में की गई है, जहाँ विशेष निगरानी और बचाव कार्यों की आवश्यकता होगी। समय रहते इन स्थानों पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
आपदा मित्र का सम्मान: अदम्य साहस की मिसाल
इस बैठक के दौरान एक भावुक क्षण भी आया, जब मंत्री महोदय ने हाल ही में नदी में डूबने से जान गंवाने वाले दो व्यक्तियों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान चेक प्रदान किया। यह सरकारी सहायता उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि आपदा पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता और तत्काल सहायता उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।इसके अतिरिक्त, 10 जून 2026 को कीरतपुर अंचल के झगुआरा गांव में हुई एक नाव दुर्घटना में सात व्यक्तियों को अपनी जान जोखिम में डालकर बचाने वाले आपदा मित्र रमेंद्र कुमार को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंत्री ने उनके इस साहसी और निस्वार्थ कार्य को ‘देवतुल्य’ बताया। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि रमेंद्र कुमार के नाम को राज्य आपदा प्रबंधन पुरस्कार के लिए अनुशंसित किया जाए, ताकि उनकी बहादुरी को उचित सम्मान मिल सके।रमेंद्र कुमार ने भीषण परिस्थितियों में भी अपनी जान की परवाह न करते हुए डूब रहे सभी सातों व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनका यह कार्य अदम्य साहस और मानवीयता की एक अनूठी मिसाल है, जो समाज में सेवा भाव को बढ़ावा देता है। ऐसे समय में जब Bihar Disaster Management की चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, रमेंद्र कुमार जैसे बहादुर लोग हमारे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं और दूसरों को भी मदद के लिए आगे आने को प्रेरित करते हैं।
जल निकासी और नहरों की समस्या पर मंत्री का सख्त आदेश
दरभंगा जिला अक्सर मानसून के दौरान गंभीर जलजमाव की समस्या से बुरी तरह प्रभावित होता है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए, नगर निगम, दरभंगा को सम्प हाउस के निर्माण कार्य में तेजी लाने और आवश्यक सक्शन मशीनों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया गया है। इन उपायों से शहरी क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा और लोगों को जलजमाव से होने वाली परेशानियों से मुक्ति मिल सकेगी।ग्रामीण कार्य विभाग को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि जिले में शेष बचे सभी पुल-पुलियों की सफाई समय पर करवा ली जाए। पुल-पुलियों में जमा कचरा और गाद पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा डालता है, जिससे बाढ़ का पानी निचले इलाकों में जमा हो जाता है। इनकी नियमित सफाई से पानी के सहज निकास को सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा कम होगा।देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करेंआप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।जिला प्रशासन, दरभंगा ने इस साहसी आपदा मित्र रमेंद्र कुमार के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। आपदा के समय अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को नया जीवन देना सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है, और रमेंद्र कुमार ने इसे बखूबी निभाया है। उनका यह अनुकरणीय कार्य समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि एकजुटता और साहस से किसी भी आपदा का सामना किया जा सकता है।







